छत्तीसगढ़

क्या युवा बस वोट बैंक बनकर रह गए है..!

  • प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज से पास होकर निकले छात्र प्राइवेट ट्यूशन पढ़ा रहे

  • स्वरोजगार के लिए मध्यम परिवार के पास न तो जगह और न रुपए खरीदने के पैसे

डॉ. दिनेश मिश्र वरिष्ठ नेत्र विशेषज्ञ एवं अध्यक्ष अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति। रायपुर,काकाखबरीलाल। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। राजनीतिक दल युवा वर्ग के लिए चुनाव के समय शिक्षा, रोजगार का वादा करते हैं। अपने सुखद भविष्य की सोच में युवा पीढ़ी ना केवल उत्साहपूर्वक मतदान में भाग लेती है, बल्कि अनेक तो सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में भी दिखाई पड़ते हैं। बाद में जब वास्तविकता सामने आती है तब परिदृश्य कुछ और ही होता है।

देश और समाज का दारोमदार युवा पीढ़ी पर ही टिका होता है, इसलिए युवाओं को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराए जाने की आवश्यकता है। छात्र स्कूल-कॉलेजों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनको सही मार्गदर्शन देना उनके लिए रोजगार, व्यवसाय की जानकारी देना सरकार और समाज का काम होता है।

आज भी कई बार यह देखा गया है कि किसी तृतीय वर्ग कर्मचारी, चपरासी या क्लर्क जैसी नौकरी के लिए भी 25 पोस्ट के जवाब में हजारों एप्लीकेशन आते हैं, जो कि उच्च शिक्षित होते हैं तथा कहीं नौकरी या काम नहीं मिलने के कारण छोटे से छोटा काम करके भी अपना जीवन-यापन करने के लिए मजबूर होते हैं। युवा वर्ग के लिए एक गाइडलाइन बनाने की आवश्यकता है तथा उसे समय-समय पर परिमार्जित करने की भी आवश्यकता है ताकि उन्हें शिक्षा के बाद बेरोजगारी का दंश ना सहना पड़े।

प्रदेश में 100 से ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेज खुल गए थे, जिनसे प्रतिवर्ष हजारों इंजीनियर बन कर निकलने लगे थे। समय निकलने के बाद डिमांड कम होती चली गई। इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त नौजवान नौकरी ना मिलने के कारण भटकने लगे और प्रदेश के बाहर जाकर काम करने लगे या स्थानीय स्तर पर ही ठेकेदारों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों में कम मेहनताने में सुपरवाइजर के काम पर लग गए।

बहुत सारे इंजीनियर बैंकिंग के काम में लग गए। कुछ तो शिक्षक बन कर और कुछ तो प्राइवेट ट्यूशन करके काम चला रहे हैं। ऐसा ही पायलट ट्रेनिंग का हाल हुआ है। जो बच्चे एविएशन पायलट की ट्रेनिंग किए हुए हैं, 5 से 10 साल के बाद भी किसी जॉब के लिए तरस रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में नर्सिंग, कम्प्यूटर के कोर्स और कॉलेज खुलते जा रहे हैं और पास होने के बाद उन्हें कहां काम मिलेगा इस बात की कोई गारंटी नहीं है।

एम्प्लायमेंट एक्सचेंज शो पीस बनकर रह गए हैं। युवाओं के रोजगार के संबंध में एक और बात जो राजनेताओं द्वारा अकसर कही जाती है कि उन्हें स्वरोजगार करना चाहिए। पर वास्तव में देखा जाए तो यह बहुत कठिन है, क्योंकि एक सामान्य परिवार के व्यक्ति चाहे वह इंजीनियर हों या डॉक्टर या कॉमर्स का स्नातक, उसे भी अपना स्वयं का उद्यम या अस्पताल खोलना है तो उसे एक स्थान चाहिए जहां पर अपना व्यवसाय कर सके, जिसकी कीमत भी आजकल लाखों-करोड़ों में होती है।

ऊपर से लाइसेंस के लिए सरकारी प्रक्रियाओं का मकड़़ाजाल अलग। किसी भी विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र बनवाना लोहे के चने चबाने जैसा काम होता है। इसलिए युवाओं को सिर्फ वोटबैंक न समझा जाए उन्हें बहलाने के लिए छोटे-मोटे उपहार देने की बजाय, उनके बेहतर भविष्य के लिए सार्थक इंतजाम किए जाएं।

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काका खबरीलाल

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