सरायपाली

सरायपाली : विकास से कोसों दूर है ग्राम बेलडीह पठार

मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरस रहे हैं ग्रामीण

सरायपाली। ग्रामीण अंचलों में शासन विकास के चाहे लाख दावे कर ले, लेकिन वास्तविक स्थिति देखने पर आज भी कई ग्रामों में बहुत अधिक समस्याएं देखी जा सकती हैं। विकासखण्ड के दूरस्थ अंचल की ग्राम पंचायतें आज भी विकास से कोसों दूर है। एक ओर शासन लाखों करोड़ों रुपए दूरस्थ अंचल के ग्राम पंचायतों में खर्च करने के लिए देता है। लेकिन जमीनी स्तर पर योजनाओं का सही क्रियान्वयन ना हो पाने के कारण आज भी कई ग्राम पंचायतें विकास से अछूती हैं। सरायपाली मुख्यालय से 16 किमी दूर ग्राम पंचायत लमकेनी के आश्रित ग्राम बेलडीह पठार में शासन की एक भी योजना सही ढंग से संचालित नहीं हो रही है। सीसी रोड निर्माण हो या पीएम आवास किसी भी योजना का क्रियान्वयन सही ढंग से नहीं हो रहा है।
ग्राम बेल्डीह पठार के ग्रामीण भीखम खुंटे, संजय मिरी, दशरथ ओगरे, कुंजराम, विजय मिरी, सालिकराम बारिक, झनक मिरी, छत्तर सिंह मिरी, हरिराम ओगरे पंच आदि ग्रामीणों ने बताया कि खेती के लिए खाद लेना हो, ईलाज करवाना हो या अन्य जरूरी कार्य करना हो तो वे 8 किमी अतिरिक्त दूरी तय कर अपने खेत, बसना या पदमपुर जाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव से एक कच्ची सड़क बेलडीह में निकलती है, इस रास्ते में मोटरसायकल चालक तो चले जाते हैं परंतु चारपहिया वाहन नहीं जा पाता। यह कच्ची सड़क इतनी खराब है कि मोटरसायकल से जाना भी तकलीफदेह होता है। साथ ही रास्ते में एक नाला पड़ता है, जिसके कारण बरसात में यह रास्ता बंद हो जाता है। इस रास्ते को बनवाने के लिए पंचायत की बैठक में हर बार सरपंच को कहा जाता है परंतु आज पर्यन्त तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया। बरसात आते ही नाले में पानी जाने की वजह यह कच्चा मार्ग बंद हो जाता है। ग्रामीणों को इस कच्चे मार्ग से जाने पर उन्हें सिर्फ 2 किमी ही अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। अगर कोई गांव में गंभीर रूप से बीमार पड़ता है तो अच्छे ईलाज के लिए पदमपुर या बसना ही ले जाना पड़ता है। इस स्थिति में ग्रामीणों को 8 किमी अतिरिक्त दूरी तय कर तोषगांव चैक से भालूकोना होते हुए पझरापाली मार्ग से जाना पड़ता है। बेल्डीह पठार के लगभग 100 से अधिक ग्रामीण प्रतिदिन बसना, पदमपुर व्यापार हेतु आना-जाना करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इस कच्चे मार्ग को बना दिया जाये तो कम दूरी तय करनी पडेगी और यह रास्ता सुगम भी होगा। हालांकि ग्रामीण सड़क की समस्या के निदान के लिए अनेक बार पंच से लेकर सरपंच तक शिकायत कर चुके हैं। उनका कहना है कि सरपंच बनने के बाद से आज तक उनके गांव में सरपंच नहीं आये हैं।

इसके अलावा ग्रामीण मुख्य मार्ग से गांव के अंदर तक जाने वाले मार्ग को क्रांक्रीटीकरण करने के लिए भी लंबे समय से मांग करते आ रहे हैं। इसके बाद भी पहल नहीं किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश नजर आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से गांव विकसित हुआ तब से उनके गांव में रोड का क्रांक्रीटीकरण नहीं किया गया है। रास्ते में कीचड़ और गड्ढों के कारण बरसात में इसमें चलना मुश्किल हो जाता है। 15 साल में दो पंचायती कार्यकाल में गांव के अंदर गली के 100 मीटर को ही सिर्फ बनाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव आज भी विकास से कोसो दूर है। जबकि उनके पंचायत लमकेनी में मुख्य मार्ग से गांव के अंदर तक सीसी रोड का निर्माण किया गया है। इसके साथ कई ग्रामों में विकास कार्य हो रहे हैं, परंतु उनके गांव में सभी विकास कार्य रूके हुए हैं।

गांव में है निस्तारी की समस्या
गांव में निस्तारी के लिए ग्रामीणों को सबसे बड़ी समस्या हो रही है। गांव में एक तालाब है वह भी एक निजी व्यक्ति का है, जिसके गहरीकरण कर 2011-12 में तालाब बनाया गया था। इस तालाब में बहकर पानी आने का स्त्रोत नहीं है और गंदे पानी की निकासी के लिए भी कोई रास्ता नहीं है। इसके कारण इस तालाब के पानी से बहुत ही बदबू आ रही है और जलकुंभी भी भर गए हैं। ग्रामीणों को पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह तालाब गंदा हो गया है, जिससे कोई भी ग्रामीण नहीं नहाता। इस तालाब का पानी भी दिसम्बर में सूख जाता है। मजबूरन ग्रामीणों को 2 किमी दूर एक बांध में जाकर नहाना पड़ता है। गांव में एक भी बड़ा तालाब नहीं है। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत और वन विभाग ने मिलकर वन विभाग की जमीन में तालाब निर्माण करने पर सहमति दी थी। लेकिन पंचायत तालाब निर्माण करवाने में रूचि नहीं ले रहा है। जबकि वन विभाग के जमीन में तालाब निर्माण किए जाने से जंगली पशु पक्षियों को भी इससे फायदा होगा और ग्रामीणों को भी। साथ ही पानी आने का स्त्रोत भी पहाड़ से होगा।

पीएम आवास बनाने के लिए ग्रामीणों ने जमीन को रखा गिरवी
शासन की महत्वकांक्षी योजना पीएम आवास मैं भी यह ग्राम पिछड़ा हुआ है। यहां कई हितग्राही है जिनका पीएम आवास स्वीकृत हुआ और निर्माण भी हुआ, लेकिन एक दो किश्त मिलने के बाद बाकी किश्त को लटका दिया गया है। हितग्राही विजय कुमार मिरी, सालिकराम बारिक, धरम दास मिरी, शांति ओगरे, रोहिदास ओगरे, डाहरू मिरी, पारत कुमार मिरी आदि ने बताया कि उनका पीएम आवास स्वीकृत होकर आधा निर्माण भी कर दिया गया है। पंचायत द्वारा कहा गया कि पूरा बनाने के बाद ही आखिरी किश्त मिलेगी। इसके कारण कई हितग्राहियों ने जमीन गिरवी रखकर आवास बना लिए। लेकिन 2019 के बाद से अब तक अपनी राशि पाने के लिए भटक रहे हैं।

जब इस संबंध में सरपंच कल्पना जगत से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि निस्तारी वाली जो समस्या है वह वन विभाग को लिख कर दे दिए हैं, जमीन वन विभाग का है वहीं बनाएंगे। वहीं पीएम आवास के लिए उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकाल में पीएम आवास नहीं बना है, बाकी की जानकारी मुझे नहीं है। वहीं मुख्य मार्ग से गली तक सीसी रोड के लिए उन्होंने कहा कि अभी स्वीकृति नहीं मिली है, मिलने के बाद कार्य प्रारंभ किया जाएगा।

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छत्तरसिंग पटेल

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