जाको राखे साइयां मार सके न कोई : फूल सी नन्ही बच्ची को छोड़ दिया घने जंगलों में… फिर हुआ कुछ ऐसा..

–डिग्रीलाल जगत
रायगढ़ /खरसिया (काकाखबरीलाल) । बहुत ही दुखद वाकिया आज एक बार फिर रायगढ़ जिले के खरसिया विधानसभा के ग्राम सोनबरसा में फिर मानवता शर्मसार हो गई है।पहाड़ों के बीच जंगली इलाके में जहां जंगली सुअर,जंगली भालू और अनेक हिंसक जंगली जानवरों का बसेरा है वहां पर किसी निर्मोही माँ और निर्मोही पिता के द्वारा फूल सी मासूम सुंदर बेटी को मरने के लिए छोड़ दिया गया था।इस जंगली इलाके में ऐसा उनके द्वारा किया गया उससे ये तो पता चल ही गया कि वहां उस निर्मम माँ पिता,जो सम्भवतः अवैध सबन्धों के बाद ,या फिर बेटी होने के कारण दुनिया मे आई इस बच्ची को मरने के लिए छोड़ गए थे।परन्तु जिसको भगवान ने यहां भेजा है उसे बचाने के लिए भी वह हर वक्त खड़े होते है,कहते है न जाको राखे साईंया मार सके न कोई।
रायगढ़ जिले में बेटियो की संख्या में के कमी के बाद युद्ध स्तर पर स्त्री लिंगानुपात बढाने के लिए,रायगढ़ से ही बेटी बचाओ,बेटी बढ़ाओ की योजना की शुरुवात हुई थी,वही वृदद स्तर पर इस अभियान के प्रचार प्रसार व जागरूकता के लिए पूरा प्रशासनिक अमला युद्ध स्तर पर इस योजना को एक आंदोलन के रूप में लेकर इसे जनांदोलन का रूप दिया गया कई बार मानव श्रृंखलालाएं बनाई गई,कई आयोजन किये गए,बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के गगनचुंबी नारे भी लगाए गए,रायगढ़ मुख्यालय में तो पूरे भारत देश का पहला बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ चौक भी बनाया गया,जन जन को जागरूक करने का कार्य किया गया है,इस हेतु प्रत्येक वर्ष लगभग 5 वर्षों से रायगढ़ कलेक्टर को दिल्ली और अन्य स्थानों में सम्मानित भी किया गया है।फिर भी लोगों के मन मे इस तरह की मानसिकता का आना बेहद चिंतनीय है।
लेकिन ये हमारा दुर्भाग्य है कि फिर भी हमारा सरकारी तंत्र ऐसी घटनाओं को रोकने में लोगों की मानसिकता बदलने में आज भी नाकामयाब दिखाई दे रहा है।अनेक प्रयासों के बाद भी आज भी बेटियो को कुछ लोग जो बड़े ही कुत्सित मानसिकता के है इस तरह सोच से अपमानित करते आ रहें है,उन्हें मारने ,फेंकने,हत्या करने की सोच आज भी उन लोगों के मन मे आ रही है ये कही न कही हमारे प्रयासों में कमी और सरकारी तंत्र की औपचारिता निभाओ सोच को दर्शा रहा है।प्रत्येक ग्रामो में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं, मितानिनों, महिला समूहों को ग्राम में सक्रियता दिखाने के लिए निर्देशित किया गया है,गर्भावस्था से लेकर जबतक बच्चे का जन्म हो जाता है तब तक वह सरकारी देख रेख में रहती है,एक एक गर्भवती महिलाओं का उल्लेख आंगनबाड़ी में होता है महिला बाल विकाश विभाग के देख रेख में गर्भवती महिला रहती है फिर भी ऐसी घटनाओं में सबंधित अपराधी माता पिता कैसे बच जाते है यह एक यक्ष प्रश्न है।
बच्ची आसमान से नही टपकी यह तो सभी जानते है,फिर सबंधित विभाग से उस गर्भवती महिला का पता लगाना इतना मुश्किल कार्य क्यों है जिसने इस बच्ची को जन्म दिया और फिर उसे मरने के लिए जंगल मे छोड़ दिया।ऐसी घटना इस जिले में औऱ भी हो गई है एक बार खरसिया की पुरानी बस्ती में नवजात बच्ची को दो टुकड़े काटकर नाली में फेंक दिया गया था लेकिन आज दिनांक तक वह अपराधी पकड़ से बाहर है पुलिस और प्रशासन उस केस को भूल ही गए है।और जो अपराधी है वो अभी तक पकड़ से बाहर है।इस विषय को गम्भीरता से न लेना प्रशासनिक तंत्र की बड़ी लापरवाही है क्योंकि ऐसे मामलों में जब तक कड़ी कार्यवाही नही होगी,ये घटनाएं दोहराई जाएंगी।वही हो भी रहा है।
सोनबरसा ग्राम के ही ग्रामीणों ने मितानिन और सरपंच ने परिवार सहित उस बच्ची की जान को बचाया मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए बच्ची को घर ले जाकर फिर ग्राम महिला सरपंच में 112 को सूचित किया उसके बाद उस नवजात बच्ची को सिविल अस्पताल खरसिया लाया गया,पत्रकार भूपेंद्र वैष्णव जी के द्वारा तत्काल महिला बाल विकाश अधिकारी पुनिता दर्शन को सूचित किया गया तत्काल पुनिता दर्शन जी सिविल अस्पताल पहुँची अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए पूरे इलाज के दौरान अस्पताल में ही रही।खरसिया में चाइल्ड डॉक्टर न होने की वजह से बच्ची को रायगढ़ रेफर किया गया है।
जब मीडिया में आई खबर तो कई ऐसी माँऐं जिनकी गोद अभी सुनी है उन्होंने उस बच्ची को गोद लेने के लिए अस्पताल के डॉक्टरों पत्रकारों व प्रशासनिक अधिकारियो को सम्पर्क करने लगी है,ये होती है एक माँ की तड़प।
खरसिया कुछ जिम्मेदार पत्रकार साथियों ने एक जिम्मेदार सजग नागरिक होने का कर्तव्य निभाते हुए पूरे उपचार के दौरान अस्पताल में उपस्थित रहे,औलाद के लिए तरसने वाले परिवारों को समझाते रहे प्रशासनिक लिखा पढ़ी जांच के बाद ही गोदनामा की प्रक्रिया हो सकती है धैर्य रखें कहकर।
महिला सरपंच ,मितानिन ,112 आपातकाल सेवा वाहन दोनों आरक्षक डॉ किरण चौहान,पत्रकार भुपेन्द्र किशोर वैष्णव, महिला बाल विकाश अधिकारी पुनिता दर्शन,समस्त प्रशासनिक अमला जिन्होंने इन परिस्थितियों में उस बच्ची के असल माँ और भगवान बनकर विकट संकट की घड़ी में उसकी जान बचाई आप सभी को सादर अभिवादन व धन्यवाद ज्ञापित करती हूं।सबसे बड़ा धन्यवाद उस परमात्मा को देती हूं जिन्होंने उन निर्मोहियो के मनसूबे को नाकामयाब किया और आज वह बेटी सुरक्षित है हमारे बीच।
लेकिन फिर भी आज फिर एक बार मैं स्तब्ध हूं इस घृणित मानसिकता की सोच को सोचकर, देखकर, सुनकर, पढ़कर,भीषण जंगल मे एक नवजात फूल सी बच्ची को फेंक दिया गया ऐसा कोई कैसे कर सकता है और क्यों,आखिर कब तक ऐसा होगा,जल्द से जल्द ये अपराधी निर्मोही, लोग प्रशासन की पकड़ में आने चाहिए नही तो फिर ये घटना बार बार दोहराई जायेगी।

























