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पहले मान फिर अपमान : पद्म श्री सुरेंद्र दुबे को कवि सम्मेलन में आने से चक्रधर समारोह आयोजन समिति से मना कर दिया : पहले आमंत्रण, कार्ड में नाम और फिर मना कर आयोजन मण्डल ने छुई अनादर की नई बुलन्दी

-डिग्रीलाल जगत

रायगढ़ (काकाखबरीलाल)। छत्तीसगढिया मुख्यमंत्री और छत्तीसगढिया सरकार का लबादा ओढ़े प्रदेश की सरकार द्वारा आयोजित चक्रधर समारोह की आयोजन समिति ने पद्म श्री कवि और साहित्यकार श्री सुरेंद्र दुबे को पहले चक्रधर समारोह में आमंत्रित किया। दूसरे कवियो की टीम बनवाई। पारिश्रमिक तय कर स्वीकृति दी। बकायदा उनका नाम आमंत्रण पत्र में छापा और अब उन्हें फोन करके आयोजन में शिरकत करने से मना कर दिया। चक्रधर समारोह आयोजन मण्डल की तरफ से गए एक फोन ने पद्म श्री सुरेंद्र दुबे को बेहद आहत तो किया ही है साथ ही सरकार की छत्तीसगढिया सरकार होने पर सवालिया निशान लगाते हुए उसकी कलई भी खोल दी है।

उक्ताशय की प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए भाजपा नेता आलोक सिंह ने कहा है कि इस बार आयोजन मण्डल के विवादास्पद निर्णयों ने चक्रधर समारोह की भद्द पीटने की कोई कोर कसर बाकी नही रखी है। जिस प्रदेश में साहित्यकारों और कवियों का अनादर होता हो उस प्रदेश की उन्नति की कल्पना भला कैसे की जा सकती है ? कहा जाता है कि कवि और साहित्यकार समाज के दर्पण होते हैं। भूपेश सरकार ने उस दर्पण को ही चकनाचूर कर दिया है।
आलोक सिंह ने कहा कि आज अपरान्ह तीन बजे जब उन्होंने पद्म श्री सुरेंद्र दुबे से इस बात की पुष्टि के लिए फोन पर बात की तो उनका दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा कि वो बहुत से आयोजनों में जाते है अभी दस अगस्त को ही वो अमरीका में छत्तीसगढ़ियों के सम्मेलन में मुख्य अतिथि थे। इस आयोजन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी शिरकत करना था पर वो किसी कारणवश नही पहुचे मगर पद्म श्री सुरेंद्र दुबे ने उस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि की आसंदी से छत्तीसगढ़ का प्रतिनधित्व किया। बात किसी आयोजन में शिकरत करने न करने की नही है बल्कि यह उन्हें अपमानित किये जाने का मामला है। उन्होंने कहा कि आयोजक मण्डल की तरफ से उन्हें मेल किया गया और उन्हें उनके सहित अन्य कवियों की टीम बनाने को कहा गया। जिसपर उन्होंने तीन कवियों के नाम सुझाये। आयोजक मण्डल ने पारिश्रमिक सहित उन कवियो पर स्वीकृति दी।शेष नाम आयोजक मण्डल ने दूसरे स्रोतों से तय किये। उनके नाम आमंत्रण पत्र में छापे गए और उसकी एक प्रति उन्हें भी भेजी गई। फिर अचानक जाने क्या हुआ कि अभी हाल ही में उन्हें फोन कर के यह कहा गया कि आप के नाम पर सहमति नहीं बन रही है इस लिए आप न आये। श्री सुरेंद्र दुबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा की जीवन भर सेवा और अपनी माटी की सुगंध देश विदेश में फैलाने का अजब उन्हें इनाम दिया गया है।उन्होंने कहा कि क्या बिना सहमति के ही उन्हें मेल कर स्वीकृति दे दी गई और आमंत्रण पत्र में नाम भी छाप कर कार्ड वितरित कर दिए गए

आलोक सिंह ने कहा है इस बार का चक्रधर समारोह बार बार ऐसे कारणों से चर्चित हो रहा है जो नही होना चाहिए। पहले कार्यक्रम स्थल को लेकर विवाद, फिर आमंत्रण पत्र में धार्मिक आस्था से खिलवाड़ का मामला, पत्रकारों के बहिष्कार का मामला, फिर आयोजन स्थल पर भीड़ न होने पर छात्रावास की छात्राओं को हास्टल से लाकर बैठाने का मामला और अब छत्तीसगढ़ के शीर्ष कवियो में शुमार पद्म श्री सुरेंद्र दुबे का अपमान जैसे मामले सुर्खियां बटोर रहे है जो कतई उचित नही कहे जा सकते। आलोक सिंह ने मांग की है कि आयोजक मण्डल मामले को संज्ञान ले। जिले के मंत्री उमेश पटेल और विधायक प्रकाश नायक एक कवि के सम्मान की रक्षा करें और उन्हें उसी आदर से आमंत्रित करें जिस भाव से उनका कार्यक्रम सुनिश्चित किया गया था।

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