छत्तीसगढ़

जिमीकंद की खेती से लिखेंगे स्व सहायता समूह की दीदियां अब विकास की नई कहानियां

सुराजी गांव योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है जिसमे गांव की महिलाओं के योगदान से इस योजना का सकारात्मक परिणाम नजर आ रहा है। राज्य शासन की महत्वाकांक्षी योजना नरवा, गरवा, घुरूवा एवं बाड़ी से स्व सहायता समूह की दीदियों के जीवन मे खुशहाली आयी है। इस योजना तहत जिले में गौठानो को आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिले के सुदूर विकासखण्डों में भी इस योजना का लाभ गांव के गरीब ग्रामीणों को लगातार मिल रहा है ऐसे ही विकासखण्ड कुआकोंडा के मांझी पारा गौठान में राष्ट्रीय ग्रमीण आजीविका मिशन की स्व सहायता समूह की दीदियों द्वारा गौठान के अंदर ही जिमीकंद व हल्दी की खेती की गई थी। दीदियों द्वारा बताया गया कि इनके पास पर्याप्त भूमि भी नही थी जहाँ इस प्रकार से सब्जियों की खेती की जा सके। गौठान में उपलब्ध बाड़ी में दीदियों को सब्जी लगाने के लिए पूर्व में कुछ माह पहले कृषि विभाग द्वारा हल्दी व जिमीकंद के बीज प्रदान किये गए थे, जिसे लगाकर गायत्री स्व सहायता समूह माँझीपारा द्वारा 300 किलोग्राम जिमीकंद व 620 किलोग्राम हल्दी का उत्पादन किया गया और स्थानीय बाजारों में विक्रय किया। जिसमें इन दीदियों को 30 हज़ार रुपये की आमदनी प्राप्त हुई। समूह की दीदियां गौठान में ही उन्नत खेती कर आत्मनिर्भर बन अर्थव्यवस्था को सुधारने में अपना  योगदान दे रहे हैं। इससे आमदनी और रोजगार का नया जरिया मिला है। जहाँ एक ओर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं वहीं दूसरी ओर महिलाओं की शसक्तीकरण के लिए एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरता नजर आ रहा है। अब जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में भी सुराजी ग्राम योजना का सपना साकार होता जा रहा है।

AD#1

छत्तरसिंग पटेल

हर खबर पर काकाखबरीलाल की पैनी नजर.. जिले के न. 01 न्यूज़ पॉर्टल में विज्ञापन के लिए आज ही संपर्क करें.. +91 76978 91753

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!