छत्तीसगढ़

उत्तर-पूर्व चीन में मिला दुनिया का सबसे बड़ा गड्ढा

उत्तर-पूर्व चीन में स्थित चंद्रमा के आकार का एक इम्पैक्ट क्रेटर धरती पर उल्कापिंड के गिरने से बना ‘सबसे बड़ा गड्ढा’ है। दरअसल यह एक लाख साल के अंदर बना दुनिया का सबसे बड़ा गड्ढा है। नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने एक बयान में कहा कि 2020 से पहले तक चीन में खोजा गया एकमात्र इम्पैक्ट क्रेटर जियुयान काउंटी में पाया गया था। फिर जुलाई 2021 में वैज्ञानिकों ने पुष्टि करते हुए कहा कि अंतरिक्ष से एक विशालकाय चट्टान के धरती से टकराने के चलते लेसर जिंगान पर्वत श्रृंखला में विशालकाय भूवैज्ञानिक संरचना का निर्माण हुआ था।टीम ने इस नए गड्ढे की खोज को Meteoritics and Planetary Science मैग्जीन में प्रकाशित किया था। यिलान क्रेटर 1.85 किमी लंबा है और इसकी गहराई 300 मीटर है। यह गड्ढा घने जंगलों से घिरा हुआ है। इसकी सतह 150 मीटर ऊंची है और यह मूल रूप से लगभग 46,000 और 53,000 साल पुराना है। हजारों साल में इस क्रेटर का दक्षिणी हिस्सा गायब हो चुका है लेकिन बाकी गड्डा अभी भी सुरक्षित है। एक लाख साल पहले टकराया था उल्कापिंड वैज्ञानिकों ने क्रेटर की खुदाई की और मिट्टी की जांच कर पाया कि इसका निर्माण हजारों साल पहले पहले एक विशालकाय उल्कापिंड के टकराने से हुआ था। खबरों के मुताबिक इस गड्ढे के नीचे एक झील हुआ करती थी। लेकिन अब वह दलदल बन चुकी है। इसके नीचे ग्रेनाइट पत्थरों की एक मोटी परत भी मौजूद है। वैज्ञानिकों के मुताबिक उल्कापिंड की धरती से टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि परत कई हिस्सों में टूट गई और कई पत्थर पिघल गए।

माना जाता है कि उस टक्कर के दौरान तापमान 1200 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो गया था जिसने कई ग्रेनाइट पत्थरों को क्रिस्टल में बदल दिया। क्रेटर का नाम गड्ढे के पड़ोसी शहर यीलान के नाम पर रखा गया था। माना जाता है कि करीब 100 मीटर चौड़ा उल्कापिंड इस जगह पर धरती से टकराया होगा। अब तक 190 इम्पैक्ट क्रेटर की खोज की जा चुकी है। धरती पर मौजूद सबसे पुराने गड्ढे की उम्र 200 करोड़ साल है।

 

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काका खबरीलाल

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