छत्तीसगढ़

5 बिस्तर के अस्पताल में एक ही दिन में जन्मे सात नए मेहमान जगह कम पड़ी तो पंचायत ने किराया भंडार से मंगवा लिए गद्दे

एक तरफ अंबिकापुर के अस्पताल में नवजातों की मौत सुर्खियां बन रही है और इधर बलौदाबाजार के रिसदा गांव में 5 बिस्तर के अस्पताल में एक ही रात में 7 बच्चों का जन्म हुआ। सभी डिलीवरी नार्मल हुई। जगह कम पड़ी तो एक महिला के परिजन घर से गद्दे ले आए। एक अन्य महिला के लिए पंचायत ने किराया भंडार से गद्दा मंगवा लिया।

संस्था प्रभारी आरएमए डॉ. अविनाश केसरवानी ने बताया कि शनिवार की शाम 7 बजे से प्रसव के लिए आई सभी 7 महिलाओं की रविवार सुबह 7 बजे तक सामान्य डिलवरी हो चुकी थी जिसमें 5 लड़कियां और 2 लड़के हैं। 5 बिस्तरों के सेटअप वाले गांव के इस छोटे से अस्पताल में प्रसव के लिए परिजनों के साथ आईं 5 महिलाओं को भर्ती तो कर लिया गया था पर अस्पताल में जगह नहीं बची थी। ऐसे में दर्द से तड़पती महिला ज्योति पुरैना को भर्ती करने के लिए उसके परिजन आ पहुंचे। बिस्तर न होने की वजह से उन्हें जिला अस्पताल रेफर करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने जिला अस्पताल जाने से इंकार कर दिया। उन्होंने अपने घर से ही बिस्तर का इंतजाम किया।

छोटे से अस्पताल की बड़ी उपलब्धि, 256 डिलीवरी
इस साल महज 289 दिनों में 256 डिलीवरी यहां हो चुकी हैं। इसका श्रेय यहां पदस्थ नर्स प्रमिला जांगड़े, शशिलता आज़ाद, खिलेश्वरी दिवाकर को जाता है जिन्होंने लगातार केस में सामान्य प्रसव करवाकर लोगों के बीच यह विश्वास जगाया है।

रिसदा पंचायत ने किराया भंडार से मंगाए बिस्तर
अस्पताल प्रबंधन ने टीकाकरण कक्ष को खाली कराकर मरीज को भर्ती किया ही था कि दर्द से बिलखती 7वीं महिला ईश्वरी धृतलहरे को भी उसके परिजन सुबह 5 बजे लेकर पहुंचे। उन्हें भी जगह न होने की बात बताई गई मगर परिजनों ने दूसरी जगह प्रसव कराने से इंकार कर दिया। इसी दौरान रिसदा ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि आगे आए और उन्होंने किराया भंडार से किराए के बिस्तर का इंतजाम किया, तब जाकर इस 7वीं महिला को भर्ती किया गया।

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छत्तरसिंग पटेल

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