सरायपाली : 60 दिन में तैयार हो गया साठिया धान

इन दिनों पककर तैयार हो गया है। धान कि बालियां लहलहा रही हैं तो कहीं-कहीं धान की कटाई भी शुरू हो गई है। इसकी अवधि 60 दिनों की रहती है, इसलिए साठिया धान की बोआई अधिकतर किसान करते हैं। आसमान में भी बदली छाये रहने तथा बारिश होने पर फसल को नुकसान पहुंच सकता है। वही सैकड़ों खेतों में अभी भी पानी की कमी बनी हुई है। खेतों में फसल बचाने लायक ही पानी है।

बारिश होने से अन्य किस्म के फसलों में राहत
दूसरी ओर अंचल में कुछ क्षेत्र में अभी भी बारिश की कमी बनी हुई थी, खेतो में पर्याप्त पानी नहीं होने से तालाब, नाला, बोर आदि से सिंचाई प्रारंभ कर दिए थे। वैसे भी इस वर्ष शुरुआत से ही बारिश की कमी बनी हुई है। आज हुई चारिश से अन्य फसलों को राहत मिली है। बीते विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर पूरे विकासखण्ड में बारिश हुई थी. इसके लंबे समय तक सिर्फ खण्ड वर्षा हो रही थी और आज मूसलाधार बारिश होने से किसानों में खुशी दिखी है। तोरेसिंहा, बलोदा क्षेत्र के गांव तथा शहर आसपास के सैकड़ों गांवों में अभी भी खेतों में पर्याप्त पानी नहीं था। इसके चलते किसानों की मुश्किले बढ़ गई थी।
क्षेत्र में टिकरा भूमि की अधिकता वाले गांव हैं, जहां मूंग उड़द मूंगफल्ली से ज्यादा धान की फसल लेते हैं। इनमें सबसे कम समय में अच्छी पैदावार देने वाला साठिया धान है, जो इन दिनों पककर तैयार हो गया है। इसमें किटनाशक आदि का खर्च नहीं रहता। किसानों की मानें तो केवल खरपतवार साफ करने का ही खर्च अधिक रहता है। समय समय में बारिश होते रहने से पौधे का विकास भी अच्छा रहता है। इस वर्ष इसके अनुकूल बारिश होने से इसके उत्पादन भी ठीक रहने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन इन दिनों ज्यादा बारिश होने पर फसल को नुकसान हो सकता है।


























