दुर्ग

महिला सो रही थी अपने बच्चे के साथ पलंग पर मच्छरदानी में घुसा जहरीला सांप , गहरी नींद में ही सांप को गुब्बारा समझ पकड़ लिया … फिर जाने क्या हुआ

भिलाई (काकाखबरीलाल). कोहका के साकेत नगर में गुरुवार देर रात एक चौकाने वाली खबर सामने आई है. यहां मच्छरदानी के अंदर एक जहरीला सांप घुस गया. इस दौरान महिला अपने बच्चे के साथ पलंग पर सोई थी. महिला गहरी नींद में ही सांप को गुब्बारा समझ पकड़ लिया. जब सांप ने फुपकार तो उसकी नींद खुल गई. इसके बाद सांप कहा गया, उसे दिखाई नहीं दिया. परिवार ने रात तकरीबन ढाई बजे नोवा नेचर के अजय कुमार को कॉल किया. उन्हें बताया कि नामदेव नारखेड़े के घर में सांप घुस गया है.नामदेव की बेटी प्रीति पाटिल ने अजय को बताया कि जब वे नींद में थे तो उन्हें लगा कि बच्चों ने गुब्बारा फुलाकर रखा है. जिसमें से हवा निकल रही है. जिस ओर से सुरसुराने की आवाज आई नींद में ही उस ओर हाथ बढ़ाकर गुब्बारे को पकड़ने की कोशिश की. ताकि गुब्बारे की हवा बंद कर सके. जब उन्होंने गुब्बारे सोच सांप को पकड़ा तो गुदगुदाहट होने लगी. जब नींद खोलकर देखें तो उन्हें अपने हाथ में सांप दिखा. जो जोरों से फुफकारने लगा. पलंग में मच्छरदानी लगी हुई थी ताकि मच्छर से बचा जा सके लेकिन यहां तो मच्छरदानी के अंदर सांप घुस आया.
प्रीति पाटिल ने सबसे पहले अपने बेटे को उठाया जो कि नींद में था. नींद में बेटा जल्दी नहीं उठ रहा था बच्चे को अपनी और खींचते हुए कोने में पलंग पर बैठ गए. सांप पलंग पर मच्छरदानी के अंदर किस ओर तेजी से गया वह दिखाई नहीं दिया. लेकिन वह मच्छरदानी के अंदर ही थी.

प्रीति पाटिल ने अपने पापा को आवाज लगाई और सांप पकड़ने वाले को बुलाने को कहा. रात के 2.45 बजे अपने भतीजे संदीप नारखेड़े को फोन कर सूचना दी. कोई पहचान में हो जो सांप पकड़ सके. संदीप ने नोवा नेचर के सक्रिय सदस्य अजय कुमार को फोन लगाया. 15 मिनट के अंदर रेस्क्यू की जगह पहुंच प्रीति पाटिल और पीयूष को मच्छरदानी के अंदर से बाहर निकाले.

नोवा नेचर के सदस्य अजय कुमार मच्छरदानी को हिलाकर देखा. पलंग में पड़े गद्दे को पलट के देखा, लेकिन सांप दिखाई नहीं दिया लेकिन अच्छी तरह मच्छरदानी को देखने के बाद गद्दे में दबे मच्छरदानी के भाग में सांप बैठा हुआ दिखाई दिया. अजय कुमार ने बताया कि यह सांप रसैल वाइपर है, जो कि अत्यधिक विषैला होता है. यह सांप गर्मी के मौसम में नहीं निकलता. यह ज्यादातर ठंडी के मौसम में निकलता है. इस मौसम में यह सांप देखकर थोड़ा अचंभा लगा. मच्छरदानी के अंदर से रसैल वाईपर का सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया गया. लेकिन जब सांप के घर के अंदर घुसने का रास्ता देखा गया तो कुछ समझ नहीं आया सांप आया कहां से. जब घर के पीछे खुले प्लॉट की तरफ देखा गया तो वहां घने घने झाड़ियां दिखी. जहां से आने की पूरी आशंका हुई. नोवा नेचर के सदस्य अजय कुमार ने वन विभाग दुर्ग के माध्यम से राजनांदगांव के जंगल में रसैल वाईपर को सुरक्षित छोड़ दिया.

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छत्तरसिंग पटेल

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