
काकाखबरीलाल रायपुर 22 अप्रेल 2019| जनता की सरकार हो , शिक्षा व स्वास्थ्य मुद्दा हो अधिकार हो विषय पर यस डेमोक्रेसी अभियान के तहत गत 20 अप्रेल को रायपुर में जनपक्षीय संस्थाओ एवं बुधिजीविओं की एक बैठक का आयोजन किया गया था |बैठक में शिक्षा व स्वास्थ्य में असमानता को दूर करने के लिए राज्य स्तरीय चार्टर आफ डिमांड को व प्रतिज्ञा पत्र को राजनैतिक दलों को सौंपा गया तथा इस मुद्दे पर पैरवी करने के लिए एक अभियान चलाने का निर्णय लिया गया
बैठक की अध्यक्षता राज्य स्वास्थ संसाधन केंद्र के निदेशक डॉ प्रवीर चटर्जी ने की |शिक्षा व स्वास्थ्य की बात सबके साथ अभियान छत्तीसगढ़ के संयोजक तुहिन देब ने अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डाला |समर्थ संस्था की गिरिजा क्षत्री ,ऑक्सफैम छत्तीसगढ़ के प्रकाश गाड़िया ,यूनिसेफ से परवेज ,मानवाधिकार कार्यकर्ता अखिलेश एडगर ,रायपुर लोकसभा के निर्दलीय उम्मीदवार व रंगकर्मी प्रीतेश पाण्डेय व भाजपा के प्रवक्ता गौरीशंकर ने सभा में अपना वक्तव्य रखा |कार्यक्रम का संचालन रविन्द्र यादव ने किया तथा आभार प्रदर्शन नवधारा संस्था की गीता देवांगन ने किया |कार्यक्रम में मंजीत कौर ,गनपत बिरबिरावाले ,टिकेश्वर ,लता ,स्वाति ,रमेश ,गायत्री साहू, आकाश ,आर .के .कश्यप व रमेश देवांगन सहित कई बुद्धिजीविगण उपस्थित थे |
बैठक में वक्ताओं ने कहा की शिक्षा, समाज में व्याप्त असमानता को दूर करने का एक बड़ा माध्यम है | यह भी ज़रूरी है की शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्याप्त असमानता को भी दूर किया जाये | शिक्षा में विकास के काफी प्रयास हुए हैं परन्तु अभी भी बहुत कुछ करने की ज़रूरत है| शिक्षा का अधिकार कानून (राईट टू एजूकेशन एक्ट) को लागु हुए 10 वर्ष हो चुके हैं और अभी भी बहुत से क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ काफी प्रगति करने की जरुरत है | हम (शिक्षा व स्वास्थ्य की बात सबके साथ अभियान से जुड़े लोग) विभिन्न राजनैतिक दलों एवं उम्मीद्वारों से निम्नलिखित मांग प्रस्तुत करते हैं और ये आग्रह करते हैं की इन पर यथाशीघ्र कार्यवाही की जाये.

निम्नलिखित मांग
●लड़कियों की शिक्षा प्रथम प्राथमिकता हो और जिसके लिए सुरक्षित वातावरण और अधोसरंचना बनाई जाये
●आवश्यकता अनुरूप आंगनबाड़ी की संख्या बढाई जाये और नियमित और समय से सहायता तथा संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित किया जाये
●आदिवासी और दलित क्षेत्रों में विशेष आंगनवाडी की व्यवस्था की जाये जिसमें उन्ही समुदायों से सहायिका हो तो लाभप्रद होगा
● आरटीई एक्ट का समग्रता में क्रियान्वयन हो
● आबंटन को बढाने के साथ साथ समय पर संसाधनों का पहुँचना भी सुनिश्चित किया जाए
● सबके लिये नि:शुल्क व एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू हो
● सरकारी स्कूल/शिक्षण संस्थाओ को बेहतर और सुदृढ़ किया जाए
● निजी स्कूलों पर सरकार का समुचित नियंत्रण/नियमन हो तथा मनमाना फीस/डोनेशन वसूलने पर रोक लगे
● विलय के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया को रोकना खासतौर पर लड़कियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए
● शिक्षा के निजीकरण , व्यावसायीकरण व साम्प्रदायिकरण पर रोक लगाना
● समग्र शिक्षा के विकास के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष फोकस हो पर साथ साथ शहरी क्षेत्रों की अवहेलना भी न हो |एक शिक्षणरत समाज बनाने के लिए बुनियादी स्कूली शिक्षा के साथ –साथ अनौपचारिक प्रौढ़ साक्षरता कार्यक्रम की भी आवश्यकता है | इसी के मद्देनजर साक्षर भारत कार्यक्रम से जुड़े प्रेरकों को (जो अब बेरोजगार हो चुके हैं) शिक्षा/साक्षरता के अन्य कार्यक्रम से जोड़ा जाय या प्रौढ़ साक्षरता के नये कार्यक्रम को शुरू कराने की पहल की जाये |
●भारत के हर व्यक्ति को सुरक्षित ,मुक्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य का अधिकार पूर्ण रूप से मिलना चाहिए |
●सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत व विस्तारित किया जाए साथ ही साथ पूरी तरह से उपयोगकर्ता शुल्क से मुक्त किया जाए
● स्वास्थ का निजीकरण –व्यावसयीकरण पर अंकुश लगे तथा पब्लिक –प्राइवेट –पार्टनरशिप (PPP)माँडल का प्रयोग स्वास्थ व शिक्षा के क्षेत्र में न हो|
● 18 वर्ष तक की उम्र तक बाल श्रम का पूर्ण उन्मूलन किया जाए
● भेदभाव (विशेष तौर पर सीमान्त समुदायों – दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक,घुमंतू समुदाय एवं मेहनतकश वर्ग के साथ) रहित शिक्षा सुनिश्चित करना
● आदिवासी और दलित जैसे सीमांत समुदायों की शिक्षा में उनकी संस्कृति का विशेष ध्यान रखा जाये, विशेष तौर पर उन की भाषा/मातृभाषा और बोली के अनुसार शिक्षा की व्यवस्था की जानी चाहिए
● शिक्षाका अधिकार कानून (राईट टू एजुकेशन एक्ट) को विस्तारित कर 3 से 18 वर्ष तक लागू किया जाये
● शिक्षकों/शिक्षाकर्मियों की संविदा नियुक्ति समाप्त कर उनका स्थायी/नियमितकरण किया जावे |
● केन्द्रीय राज्य स्तर पर उचित कानूनों के अधिनियम के माध्यम से स्वास्थ्य देख भाल को एक न्यायिक अधिकार का दर्जा दिया जाए |
● स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक बजट पर पर्याप्त बढ़ोतरी की जाए | सकल घरेलु उत्पाद GDP का कम से कम 2.5 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए निर्धारित किया जाए |
























