धान की धीमी गति से उठाव व फड़ प्रभारियों की लापरवाही से खराब हो चुका सैकड़ों किवंटल धान

(सरायपाली काकाखबरीलाल).
खरीफ सीजन के समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद मौसम अनेक बार रुक रुक कर बारीश हुई। जिसके परिणामस्वरूप अनेक जगह के धान खरीदी के प्रभारी धान को भीगनें से बचा पाये। और क ई जगह के प्रभारी धान को भीगनें से नहीं बचा पाये। जिसके कारण धान लाखों किवंटल धान भीगकर अंकुरित होने से खराब हो गया। ऐसा ही मामला धान खरीदी केन्द्र सागरपाली, और चिवरकुटा में देखने को मिला। धान खरीदी के पश्चात अनेक बार रुक -रुक कर बारीश हुआ है। हांलाकि धान खरीदी प्रभारियों ने धान को ढकने के लिए त्रिपाल, कैपकवर की ब्यवस्था किया गया था। लेकिन तेज हवा, व बारीश से केपकवर फट गया था। लेकिन धान की रखवाली करने वाले लोगों व प्रभारी की सुझबुझ से धान भीगनें से बच गया। इसके अलावा कुछ जगह में तेज हवा से केपकवर फट गया था उसे बदलकर दुसरे लगाया गया था। कुछ धान खरीदी केन्द्र में थोड़ा धान भीग गया था, उसे सुखाकर नया बोरे में पलटी कर दिया गया था। जिससे शासन की नुकसान होने से काफी बच गया। लेकिन सागरपाली व चिवरकुटा धान खरीदी केन्द्र में भीगे हुए धान को न सुखाया गया और नहीं दुसरे बोरे में पल्टी किया गया। जिससे सैकड़ों बोरे धान अकुरित होकर खराब हो गया।
इसी प्रकार जम्हारी, मल्दामाल, तिहारीपाली, सिगबहाल आदि धान खरीदी केन्द्र में भी धान भीगकर खराब हुआ है। जिससे शासन को लाखों का नुकसान हुआ है। खराब धान के कारण राईस मिलर धान का उठाव नहीं कर रहे हैं। इस ओर उच्च अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान लापरवाह पाये जाने पर सबंधित धान खरीदी प्रभारी पर खराब हुए धान की भरपाई की जानी चाहिए।



























