सरायपाली : आजादी के 75 वर्ष बाद भी फुलझर अंचल स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधा का मोहताज स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य केंद्र

आजादी के 75 वर्ष बाद भी फुलझर अंचल स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधा का मोहताज है। सरायपाली के साथ-साथ ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य सुविधाएं कम हैं। सरायपाली में जहां साठ बिस्तर हॉस्पिटल के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है, तो बलौदा, पाटसेंदरी, सिंघोड़ा, तोषगांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है।
ओडिशा के डॉक्टर आते हैं और करते हैं इलाज
इसके अतिरिक्त ग्रामीणों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए 45 उप स्वास्थ्य केंद्र भी खोले गए हैं, लेकिन विडंबना ये है कि इन अस्पतालों में न तो डॉक्टर हैं और ना ही जरूरी दवा उपलब्ध है। वर्षों से इन अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हो पाई है। शासन की विवशता कहें या फिर समय का तकाजा चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए छात्र चिकित्सकों की सेवा लेने विवश हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 16-16 पद स्वीकृत हैं। इनमें चिकित्सा अधिकारी, आरएमए, सहायक ग्रेड-3, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, ट्रेसर, नेत्र सहायक, एमपीडब्ल्यू, एनएमए, स्वीपर वार्ड बॉय का एक-एक पद, स्टाफ नर्स का 3 पद एवं आया का 2 पद स्वीकृत है। आरएमए का पद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में वर्षों से रिक्त है। नेत्र सहायक सिर्फ सिंघोड़ा में ही कार्यरत है। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में स्टॉफ नर्स के 2-2 पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य केंद्र बलौदा में पदस्थ चिकित्सक डॉ. रमेश साहू वर्तमान में जेएनएम रायपुर में अध्ययनरत हैं। लैब टेक्नीशियन किरण कुमार खेस सीएससी बसना में कार्यरत हैं। पाटसेंद्री में ड्रेसर के पद पर पदस्थ मुकेश पटेल उच्च शिक्षा ग्रहण करने बाहर गए हुए हैं। सिंघोड़ा में पदस्थ ड्रेसर प्रेमुराम धृतलहरे सीएससी सरायपाली, एमपीडब्ल्यू महिला रामेश्वरी टण्डन सीएससी तुमगांव में, लैब टेक्नीशियन हरिशंकर साव जिला चिकित्सालय, आया धनेश्वरी चौहान सीएससी सरायपाली, पीएससी तोषगांव में पदस्थ सहायक ग्रेड 3 प्रतीक निषाद संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं रायपुर में और स्टाफ नर्स प्रह्लाद सीएचसी सरायपाली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ग्रामीण अंचल के अस्पताल कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं और जो पदस्थ हैं, उन्हें भी अन्यत्र भेज दिया गया है। ऐसी स्थिति में ग्रामीण अंचलों की स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
सरायपाली अंचल के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के कारण यहां के मरीज इलाज के लिए पड़ोसी राज्य ओडिशा पर निर्भर हैं। गरीब किसान मजदूर वर्ग के लोग रायपुर, बिलासपुर जाकर इलाज कराने में अपने आप को असमर्थ पाते हैं। इलाज की समुचित सुविधा मुहैया नहीं हो पाने के कारण यहां के लोग इलाज कराने बरगढ़, सोहेला, पदमपुर, बुर्ला जाने विवश हैं। यही नहीं यहां की लचर चिकित्सा व्यवस्था का फायदा उठाने के लिए ओडिशा के चिकित्सक सरायपाली, बसना में अस्थाई क्लीनिक खोल रखे हैं। मोटी रकम बटोर कर ले जाते हैं। इन डॉक्टरों को यहां आकर इस तरह इलाज करने की अनुमति मिली है या नहीं यह जांच का विषय है।
सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी एवं स्वास्थ्य अमला हड़ताल पर चले जाने के चलते ग्रामीण अंचलों की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। इसका फायदा ग्रामीण अंचल के झोलाछाप डॉक्टर उठा रहे हैं। इन दिनों गांव में मौसमी बीमारी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। ये तथाकथित डॉक्टर इन बीमारियों के इलाज के नाम पर चांदी काट रहे हैं। मरीज भी जान को जोखिम में डालकर इन झोलाछाप डॉक्टरों के शरण में जाने में मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग झोलाछाप डॉक्टरों से ज्यादा उपचार कराते हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के किराना दुकानों में भी मेडिकल से संबंधित दवाइयां आसानी से मिल जाती है। लोग बिना डॉक्टरी सलाह के दवा खाते हैं।
झोलाछाप डॉक्टरों की चांदी
उच्च कार्यालय में पत्र व्यवहार किया गया है
वर्षों से पदों के रिक्त होने को लेकर उच्च कार्यालय में पत्र व्यवहार किया गया है। जिनकी पदस्थापना सरायपाली क्षेत्र में है, उनकी ड्यूटी सरायपाली से बाहर है। उनकी भी सूची उच्च कार्यालय को प्रेषित कर उनके पुन: पदस्थापना स्थल पर वापस भेजे जाने की मांग की गई है। जहां तक झोलाछाप डॉक्टरों का सवाल है। उनके विरूद्ध उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन में जल्द ही अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. बीबी कोसरिया, बीएमओ सरायपाली


























