बलरामपुर

कृषि विभाग के समन्वित कृषि प्रणाली माडल से महिलाओं को हो रही है आमदनी

बलरामपुर (काकाखबरीलाल).  कोविड-19 की इस महामारी के दौरान लाकडाउन में घर में रहकर खेती की नई तकनीक से महिला कृषक आय प्राप्त कर रही हैं। वर्तमान में चल रही इस महामारी के समय में महिला कृषकों को खेती के माध्यम से आय उपलब्ध करवाया जाए, इसके लिए जिले के कलेक्टर श्री श्याम धावड़े एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरीश एस. के निर्देशानुसार कृषि विभाग के माध्यम से ऐसे आदिवासी कृषकों का चयन किया गया, जो अपने घर के आस-पास बाड़ी में खेती करते थे तथा मछली पालन एवं अन्य सब्जी की खेती नहीं कर पाते थे। ऐसे कृषकों जिनके घरों की महिलाएं भी कृषि कार्य में सक्रिय होते हैं, इन कृषकों को कृषि विभाग के आत्मा योजना के माध्यम से खरीफ वर्ष 2020-21 में समन्वित कृषि प्रणाली को एक नए रूप में विकसित कर महिला कृषकों को जागरूक किया गया।
            कृषि विभाग के आत्मा योजनान्तर्गत जिले में कुल 75 कृषकों के 11 हेक्टेयर बाड़ी में समन्वित कृषि प्रणाली माडल तैयार किया गया है। यह माडल घर के बाड़ी में होने के कारण इसकी सम्पूर्ण देखरेख घर की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। इस तकनीक से विकासखण्ड राजपुर के ग्राम चरगढ़ की महिला कृषक श्रीमती पार्वती लकड़ा एवं विकासखण्ड बलरामपुर के ग्राम सागरपुर की श्रीमती शर्मिला द्वारा अपने घर के कामकाज के साथ-साथ धान, सब्जी, मत्स्य उत्पादन कर पौष्टिक आहार प्राप्त कर रही हैं और साथ ही साथ इसे बेचकर अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर रही हैं। श्रीमती शर्मिला बताती हैं कि कृषि विभाग से जानकारी प्राप्त कर तथा सहयोग से अपने खेतों में समन्वित कृषि प्रणाली के तहत इस खरीफ वर्ष में खेती की हैं। धान के साथ-साथ सब्जी तथा मछली उत्पादन करना एक अलग ही अनुभव था। खेती के इस प्रणाली के तहत पूरे परिवार को ताजी एवं पौष्टिक आहार भी मिल रही है तथा उत्पादन अधिक होने पर इन्हें बेच कर 25 से 30 हजार की आमदनी भी प्राप्त हुई है। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि खेती की इस प्रणाली से फसल उत्पादन लेने में बहुत सारे लाभ हैं। धान की खेत में मछली पालन करने से खेतों में मछलियों के द्वारा पानी में हलचल होता है जिसके कारण धान की उत्पादकता में वृद्धि होती है। खेतों में मछली पालन के लिए बनाए गए नालियों द्वारा वर्षा जल का संचय कर भूमिगत जलस्तर बढ़ता है। नाली बनाने से मेढ़ों की मिट्टी भुरभुरी होती है जिस पर सब्जी लगाने से सब्जी की उत्पादकता बढ़ती है। समन्वित कृषि प्रणाली की सम्पूर्ण खेती जैविक पद्धति से किया जाता है। धान तथा सब्जियों पर किसी भी प्रकार का रसायन प्रयोग नहीं किया जाता है, जिसके द्वारा कृषक अपने घरों के लिए पौष्टिक एवं जैविक आहार प्राप्त कर सकता है। जिन- जिन जगहों पर समन्वित कृषि प्रणाली माॅडल तैयार किया गया है वहां के कृषक माॅडल सेे प्रभावित होकर आने वाले खरीफ वर्ष में स्वयं द्वारा तैयार करने हेतु इच्छुक है।

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छत्तरसिंग पटेल

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