विवाहिता को भगाकर शादी करने वाले युवक के लाश को माता-पिता ने दाह संस्कार करने से किया इंकार

।।अंततः उसकी पत्नी ने मौत के दो दिन बाद किया अंतिम संस्कार।।
शुकदेव वैष्णव, बसना:-समाज से हटकर अंतर जाति विवाह कर जीवन यापन करने वाले लोगों की मौत के बाद शव का क्या हश्र होता है यह जानने के लिए खगेश्वर पिता शंकर सतनामी की कहानी बयां करता है कि जब तक जीवन अच्छा चल रहा है तब तक के सब कुछ ठीक है . जब मौत का समय आया तब उसके परिजनों ने हाथ लगाने की दूर की बात उसने अपने घर से ही किसी नाले में बहा देने का फरमान जारी कर दिया. मामला बसना थाना अंतर्गत ग्राम बरेकेल ( पिरदा ) का है . जहां 2 दिन पूर्व खगेश्वर सतनामी की हिचकी आने के बाद मौत हो गई. मौत के बाद उक्त युवक को अपने मायके के पास झोपड़पट्टी बनाकर रखने वाली पत्नी ने खगेश्वर सतनामी के अंतिम संस्कार करने उनके गांव मन पसार ले जाने उनके माता पिता को खबर भेजवाई . लेकिन युवक के माता-पिता ने खगेश्वर के शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार करते हुए कहा की खगेश्वर हमारे लिए पहले ही मर चुका है हम उसके जिंदा में और मुर्दा में भी चेहरा देखना पसंद नहीं करेंगे और ना ही अंतिम संस्कार करेंगे. बल्कि उसे किसी नाले में बहा दो. चील कौवों को बांट दो हमें कोई गम नहीं. मौत के बाद लाश दो दिन झोपड़ी में ही पड़ी रही. उसकी अवैध ढंग से शादी करने वाली पत्नी को समझ में नहीं आ रहा था की उसके पति का कैसे अंतिम संस्कार करें . 2 दिन बीतने के बाद जब शव से बदबू आना चालू हो गया तब गांव वालों ने युवक से शादी करने वाली सुमित्रा बाई एवं उसके माता-पिता परिजनों को किसी तरह युवक का अंतिम संस्कार करने का दबाव बनाया. तब आज पूर्वान्ह घटना की जानकारी थाने में दी गई . पुलिस मौके पर पहुंच कर शव का पंचनामा किया और शव को पोस्टमार्टम हेतु बसना भेज दिया पोस्टमार्टम के बाद में खगेश्वर के शव का अंतिम संस्कार बसना के चीरघर के पास उनके परिजनों द्वारा किया गया . यहां यह बताना लाजमी होगा कि खगेश्वर पिता शंकर सतनामी उम्र 25 साल ग्राम मनपसार थाना सरसीवां का मूल निवासी था. चार पांच साल पूर्व सुमित्रा बाई जाति घसिया ग्राम बरेकेल थाना बसना शादी हो कर मनपसार गई थी. सुमित्रा बाई और उसके पूर्व पति का दो बच्चा भी है. सुमित्रा बाई और 25 वर्षीय युवक खगेश्वर पिता शंकर सतनामी के बीच आंतरिक संबंध प्रगाढ़ हो गया. दोनों के प्रेम संबंध के जानकारी जब खगेश्वर के माता पिता को हुई तब उन्होंने काफी समझाया बुझाया लेकिन खगेश्वर पर इसका कोई असर नहीं हुआ तब अन्य जाति की महिला से शादी करने पर उसके माता-पिता ने उसे त्याग दिया. अपने पूर्व पति और बच्चे को छोड़कर सुमित्रा बाई ,खगेश्वर सतनामी को अपने मायके बरेकेल लाकर बिना शादी किए उसके साथ विगत 3 साल से जीवन यापन कर रही थी . वह बरेकेल में झोपड़ी बनाकर रह रहे थे . खगेश्वर सतनामी और सुमित्रा बाई हर साल ईंट भट्टा कमाने खाने जाते थे . और जैसे ही बारिश का समय आता था .वह ईट भट्ठा से बरेकेल लौटकर झोपड़ी में पति पत्नी के रूप में रहते थे. विगत 2 अगस्त को तड़के 3 -4 बजे उसे हिचकी आई हिचकी के बाद उसकी मौत हो गई. मौत के बाद घटना की सूचना उसके माता पिता को मनपसार भेजी गई . लेकिन उन्होंने शव लेने से इंकार कर दिया. अंततः 2 दिन बाद उसके पत्नी सुमित्रा बाई को ही अंतिम संस्कार करना पड़ा.

























