डी.एल.एड. ब्लूप्रिंट निर्माण हेतु तीन दिवसीय प्रशिक्षण सह-कार्यशाला सम्पन्न

काकाखबरीलाल@डेस्क रिपोर्ट। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल, रायपुर एवं परख (एनसीईआरटी, नई दिल्ली) के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की मंशानुरूप राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पूरे देश में परीक्षा प्रश्नपत्रों में एकरूपता लाने की दिशा में तीन दिवसीय “डी.एल.एड. प्रथम एवं द्वितीय वर्ष ब्लूप्रिंट निर्माण प्रशिक्षण सह-कार्यशाला” का आयोजन 29 से 31 अक्टूबर 2025 तक मण्डल कार्यालय के सभाकक्ष में किया गया। यह कार्यशाला मण्डल अध्यक्ष रेणु जी. पिल्ले के संरक्षण, मण्डल सचिव पुष्पा साहू के आदेशानुसार तथा एनसीईआरटी नई दिल्ली के परख विभागाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) इन्द्राणी भादुरी के निर्देशन में आयोजित की गई। इस कार्यशाला का संचालन उपसचिव (विद्योचित) डॉ. बी. रघु के मार्गदर्शन एवं प्रभारी उपसचिव (प्रशासनिक) प्रीति शुक्ला के सहयोग से किया गया।
इस प्रशिक्षण सह-कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में प्रश्नपत्र निर्माण की गुणवत्ता एवं एकरूपता सुनिश्चित करना था, ताकि मूल्यांकन अधिक सटीक, पारदर्शी और उद्देश्यपरक हो सके। विषय प्रवेश से पूर्व शिक्षा के उद्देश्यों पर चर्चा की गई तथा पाठ्यक्रम, प्रश्नपत्र निर्माण और मॉडरेशन की प्रक्रिया पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यशाला में प्रशिक्षण प्रदान करने वाले विशेषज्ञों में डॉ. प्रदीप कुमार साहू, मनीषी सिंह, शिवा सोमवंशी, अलका जैन, अहर्लिश पॉल, डॉ. रीता चौबे और डॉ. माधुरी बोरेकर शामिल रहे। प्रशिक्षकों ने गुणवत्तापूर्ण प्रश्नपत्र निर्माण के लिए ब्लूप्रिंट की जानकारी और उसका व्यवहारिक प्रयोग आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि ब्लूप्रिंट प्रश्नपत्र की संरचना और उद्देश्य को सुसंगत बनाए रखता है, जिससे विद्यार्थियों का समग्र मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सकता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप डी.एल.एड. प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के लिए नवीन ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है, जो छह प्रमुख डोमेन पर आधारित है, ज्ञानात्मक, बोधात्मक, अनुप्रयोगात्मक, विश्लेषणात्मक, मूल्यांकनात्मक और रचनात्मक। ज्ञानात्मक डोमेन में परिभाषा, सिद्धांत और तथ्यों की पहचान संबंधी प्रश्न रखे गए हैं। अवबोधात्मक में अर्थ, व्याख्या, अंतर स्पष्ट करना और वैचारिक समझ पर ध्यान केंद्रित किया गया है, अनुप्रयोगात्मक डोमेन में सिद्धांतों के समाधान और नई परिस्थितियों में उनके प्रयोग पर बल दिया गया है। विश्लेषणात्मक में वर्गीकरण, तुलना और विभिन्न स्रोतों से जानकारी का एकीकरण किया गया है। मूल्यांकनात्मक में समीक्षा, मूल्य निर्धारण और निष्कर्ष निकालने की क्षमता का मूल्यांकन किया गया है, जबकि रचनात्मक डोमेन में सृजन, योजना बनाना, परिकल्पना और संगठनात्मक कौशल पर विशेष ध्यान दिया गया है।
कार्यशाला के दौरान ब्लूप्रिंट की अवधारणा, शैक्षिक उद्देश्यों पर आधारित प्रश्नों के प्रकार, संतुलित प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया और अपने विषयानुसार प्रश्न निर्माण पर विशेष रूप से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने बताया कि इस कार्यशाला से उन्हें प्रश्नपत्र निर्माण के नए दृष्टिकोण और वैज्ञानिक पद्धति की समझ विकसित हुई है।
प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि डी.एल.एड. के लिए इस प्रकार की कार्यशाला पहली बार आयोजित की गई है, जिससे उन्हें अत्यंत उपयोगी अनुभव प्राप्त हुआ। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन का अनुरोध किया। यह तीन दिवसीय कार्यशाला छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल की एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय पहल रही, जो शिक्षक प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षा में उत्कृष्टता लाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम सिद्ध होगी।

























