सरायपाली

युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में भारी अनियमितता : वरिष्ठ शिक्षिका को किया जा रहा अन्यायपूर्वक प्रताड़ित, मानसिक रूप से पीड़ित शिक्षिका को नहीं मिला न्याय तो उच्च न्यायालय जाने को होंगी बाध्य

काकाखबरीलाल@सरायपाली। छत्तीसगढ़ राज्य में युक्तियुक्तकरण योजना के तहत विद्यालयों का मर्जर एवं शिक्षकों का अन्यत्र स्थानांतरण तेजी से किया जा रहा है। दुर्भाग्यवश, इस प्रक्रिया में विभागीय नियमों एवं मानवीय दृष्टिकोण की घोर अनदेखी हो रही है।

पूरा मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय केजुवा, सरायपाली का है जहां कई गंभीर गड़बड़ियां उजागर हई है।
यहां विज्ञान विषय की वरिष्ठ सहायक शिक्षिका धनेश्वरी साहू को कनिष्ठ दिखाकर ‘अतिशेष‘ घोषित कर दिया गया।
जबकि यह निर्णय पूर्णतः त्रुटिपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।

बता दें कि विभागीय सूची में कई प्रकार की त्रुटियां है जिसमें से प्रमुख त्रुटियां है :

  • ज्वाइनिंग तिथि में गलती दर्ज।
  • वरिष्ठ होने के बावजूद जन्मतिथि के आधार पर कनिष्ठ दिखाया गया।
  • परीक्षा अवधि पूर्ण कर चुके कनिष्ठ शिक्षक के रहते वरिष्ठ शिक्षिका को अतिशेष सूची में शामिल किया गया।

इस संबंध में बताया गया कि सभी संबंधित अधिकारियों को आवेदन व ज्ञापन दिया गया है, फिर भी कार्यवाही शून्य है।

त्रुटियों को सुधारने के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी सरायपाली, जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद, कलेक्टर महासमुंद को आवेदन प्रस्तुत किया गया है।

इस संबंध में शिक्षक साझा मंच संगठन ने जानकारी दते हुए बताया कि उनके द्वारा भी संगठित रूप से ज्ञापन सौंपा गया है फिर भी आज तक कोई ठोस जवाब या समाधान नहीं मिला। काउंसलिंग प्रक्रिया में सहायक शिक्षक विज्ञान विषय का एक भी पद रिक्त नहीं दिखाया गया।

सरायपाली ब्लॉक की काउंसलिंग सूची में सहायक शिक्षक विज्ञान विषय के किसी भी पद को रिक्त नहीं बताया गया, जिसके चलते धनेश्वरी साहू को जबरन बसना ब्लॉक स्थानांतरित होना पड़ा।

शिक्षक संगठन ने आरोप लगाते हुए कहा कि अन्य जिलों में प्रक्रिया न्यायपूर्ण हो रही है लेकिन महासमुंद जिले में तानाशाही चल रहा है।
सारंगढ़ जिले में त्रुटियों को सुधारते हुए युक्तियुक्तकरण को व्यवस्थित रूप से लागू किया गया। परंतु महासमुंद जिले में मनमानी किया गया है जिसमें दावा-आपत्ति की कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। त्रुटियों के लिए सुधार का अवसर नहीं दिया गया। जो कि यह प्रशासन की तानाशाही मानसिकता का स्पष्ट प्रमाण है।

मानसिक रूप से पीड़ित शिक्षिका, न्याय के लिए बाध्य होंगी उच्च न्यायालय जाने को

धनेश्वरी साहू इस अन्यायपूर्ण निर्णय से मानसिक रूप से अत्यंत पीड़ित हैं।
यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वह माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगी।

शिक्षक समुदाय एवं साझा मंच संगठन की एकजुट अपील अन्याय के विरुद्ध न्याय की मांग की है।

शिक्षक समुदाय इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच एवं त्रुटि सुधार की मांग करता है।
यदि न्याय नहीं मिला, तो जिला व राज्य स्तर पर आंदोलनात्मक निर्णय लिए जाएंगे।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, न्याय और सम्मान आवश्यक है — अन्यथा यह केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की हार होगी।

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काका खबरीलाल

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