सरायपाली

धान उठाव में तेजी नही आने पर सोमवार से फड़ प्रभारी करेंगे खरीदी बंद

जहां हो रही है परिवहन में सुविधा वहां पहले हो रहा है उठाव

काका ख़बरीलाल,सरायपाली. मौसम साफ होने के बाद भी उपार्जन केन्द्रों से धान के उठाव में तेजी नही दिख रही है. इससे खरीदी प्रभावित होने की आशंका मंडरा रही है. धान उठाव करने में यही स्थिति रही तो आगामी सोमवार से सरायपाली जिला सहकारी बैंक अंतर्गत 14 उपार्जन केन्द्रों के प्रभारी धान खरीदी बंद करने की स्थिति में है. धान का उठाव जिस तरह से होना चाहिए वह अभी तक नही हो सका है. जिससे खरीदी करने के लिए स्थानाभाव हो रहा है. जगह की कमी के चलते जो गिने चुने वाहन लग रहे हैं उनके लिए परिवहन करने में समस्या आ रही है. धान खरीदी के बाद उठाव नही होने से फड़ प्रभारियों की परेशानी काफी हद तक बढ़ गई है.

इस संबंध में सरायपाली के कई फड़ प्रभारियों का कहना है कि वे पहले से ही उठाव के लिए आग्रह कर रहे थे लेकिन इसमें बहुत ढिलाई बरतने के कारण बारिश होने से नुकसान का खामियाजा भुगतना पड़ेगा. फड़ प्रभारी भोथलडीह लक्ष्मण पटेल, जम्हारी भंजदेव डड़सेना, अमरकोट नेहरू मेहेर, जयकुमार नंद नवागड़, देवकुमार पटेल केदुवां, प्रेमकुमार साहू बोंदा, रतन मांझी नवरंगपुर, शैलेन्द्र यादव कनकेबा, सदा प्रधान सरायपाली, बेणुधर पटेल पुटका, ललित दास सागरपाली, हिम्मत प्रधान मल्दामाल, अनिल प्रधान तिहारीपाली, कौशिक बेहरा चिवराकुटा से चर्चा में बताया कि बारिश होने से स्टेग में नमी पहुंच गया है. उठाव में अगर तेजी नही आती है तो नीचे का धान खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा. धान परिवहन में लगे लोग जहां अपने समीप के ही केन्द्रों से धान का उठाव कर रहे हैं इससे कुछ केन्द्रों में तो ट्रक पहुंच रहे हैं. वहीं दूसरी ओर कई केन्द्र ऐसे हैं जहां कई दिनों बाद भी ट्रकें नही पहुंच रही हैं. इससे धान उठाव में भी असमानता बनी हुई है.

बारिश से धान के स्टेक को नुकसान

बीते दिनों हुई बारिश के बाद से उपार्जन केन्द्रों के कर्मचारियों को धान के स्टेग को बचा पाने में ीप्रभारी भागदौड़ करनी पड़ी है. फड़ में 2500 बोरी के स्टेग बनाए जाते हैं. लगभग खरीदी केन्द्रों में औसतन15 से 20 स्टेग अभी तक लग चुके हैं. अचानक बारिश हो जाने के कारण स्टेग में नीचे तक पानी पहुंच गया है. जब तक ऊपर क े बोरी का उठाव नही होगा तब तक नीचे में भींगे धान को निकाल पाना मुश्किल है. नीचे में भींगे धान को बचाने के लिए उठाव में तेजी लाना अतिआवश्यक हो गया है. यही स्थिति रही तो भींगे धान बहुत अधिक खराब होने की आशंका जताई जा रही है. फड़ प्रभारियों के मुताबिक इतने ज्यादा धान को दुबारा पल्टी करना समय, मजदूर तथा पैसे सभी तरह की परेशानी सामने आ रही है.

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Ramkumar Nayak

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