सरायपाली: क्षेत्र में चल रहा पलायन का सिलसिला


सरायपाली( काकाखबरीलाल).सरकार और प्रशासन के लाख दावों के बाद भी क्षेत्रीय मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। खरीफ सीजन के पश्चात स्थानीय स्तर पर रोजगार और वाजिब मजदूरी न मिलने की वजह से क्षेत्र के ग्रामीण दूसरे राज्यों जैसे केरल, उत्तरप्रदेश, जम्मू, कश्मीर, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र आदि राज्यों की ओर पलायन करते हैं।
हालांकि बीते दिनों चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न पार्टियों के द्वारा गरीब मजदूर वर्ग के लिए कई प्रकार की घोषणाएं की गई हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका कोई विशेष प्रभाव नहीं दिख रहा है और पूर्व वर्षों की तरह अभी भी पलायन का सिलसिला जारी है।
खेती में अलग-अलग कारणों से नुकसान व गांव में काम न मिलने के कारण रोजी-रोटी की तलाश में ग्रामीण अपना गाँव, घर, खेत-खेलिहान छोड़कर शहरों या अन्य प्रदेशों की ओर पलायन कर रहे हैं। अधिकारी, जनप्रतिनिधि भले ही इस कड़वी सच्चाई को न स्वीकारें, लेकिन शहर के कुछ स्थानों पर सुबह लोगों को वाहन का इंतजार करते हुए देखकर इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता। शहर के मुख्य मार्ग पर राम मंदिर के पास, टैक्सी स्टैण्ड, झिलमिला चौक सहित शहर के बाहर बैतारी चौक के पास देर शाम अथवा तड़के सुबह काम की तलाश में पलायन करने वालों को देखा जा सकता है।
गाँवों से पलायन रोकने के लिए शासन के द्वारा ग्रामीणों को रोजगार देने कई तरह की योजनाएँ लागू की गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होने के कारण प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के भी मजदूर अन्य शहरों या प्रदेशों की ओर पलायन करते हैं। पलायन रोकने के लिए लागू कई योजनाएं भी ग्रामीणों को गांव में काम नहीं दिला पाई हैं। यदि कहीं काम हुए भी हैं तो वह पर्याप्त नहीं है।
कहीं काम की कमी, तो कहीं समय पर मजदूरी नहीं मिलने जैसी शिकायतें अक्सर मिलती रहती हैं। इसी प्रकार की स्थिति से जूझते हुए ग्रामीण अब रोजगार की तलाश में अपना घर-बार छोड़कर शहरों की ओर कूच करने लगे हैं। ऐसा भी नहीं कि इस बारे में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जानकारी न हो, इसके बावजूद पलायन को आज तक रोका नहीं जा सका है।
मजदूरों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं कई लोग
मजदूर वर्ग लाभ से वंचित होने के कारण अपनी रोजी-रोटी और पेट पालने के लिए दूसरे राज्यों में गमन करते हैं। यह कोई प्रारंभिक अवस्था नहीं है पूर्व में भी क्षेत्र के मजदूर लगातार दूसरे राज्यों में जाते रहे हैं तथा अभी भी मजदूर दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं। इनकी मजबूरी का फायदा क्षेत्र के कुछ सक्रिय लोग उठा रहे हैं। जिनका सीधा संपर्क कंपनियों या उनके मालिकों से है।
वे कमीशन के तौर पर मजदूरों को अन्य राज्यों में ले जाकर अपना कमीशन तो पा जाते हैं, लेकिन वहां जाकर कुछ मजदूर शोषण का भी शिकार होते हैं। जबकि कुछ मजदूरों को तो रोजगार भी नहीं मिल पाता है। कुछ मजदूर जिनका कोई पता भी नहीं चल पाता, उनके साथ कोई घटना घट जाए तो उनके परिवार वालों को उनका चेहरा भी देखना नसीब नहीं होता।
यह भी है पलायन की वजह
ग्रामीणों के पलायन की एक प्रमुख वजह यह भी हो सकती है कि या तो मनरेगा से पर्याप्त रोजगार मुहैया नहीं हो रहा है, फिर काम करने वालों को पर्याप्त और समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते लोग अधिक मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में गमन कर रहे हैं। क्षेत्र में आय का एकमात्र साधन कृषि है और कृषि कार्य के अलावा शासकीय क्षेत्रों से ही लोगों को यहां रोजगार उपलब्ध हो पाता है। यदि शासन प्रशासन के द्वारा इस क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया जाए तो शायद पलायन के मामलों में कमी भी आ सकती है।



























