सरायपाली

सरायपाली :लोग अभी भी कर रहे पलायन

सरायपाली. रोजी-रोटी की तलाश में अन्य प्रदेश में जाने वाले मजदूर आम तौर पर खरीफ फसल के समय अपने घरों की ओर लौट आते हैं, लेकिन इन दिनों इसका उल्टा देखने को मिल रहा है। खरीफ सीजन शुरू होने वाला है और कई मजदूर अभी भी काम की तलाश में पलायन कर रहे हैं। विगत दिनों शहर के मुख्य मार्ग पर तड़के सुबह कुछ स्थानों पर पलायन करने वाले लोगों को वाहन की प्रतीक्षा करते हुए देखा गया। इसे देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि शायद अब खरीफ फसल से भी लोगों का मोह भंग होने लगा है।
खेती में अलग-अलग कारणों से नुकसान व गांव में काम न मिलने के कारण रोजी-रोटी की तलाश में ग्रामीण अपना गाँव, घर, खेत-खेलिहान छोड़कर शहरों या अन्य प्रदेशों की ओर पलायन कर रहे हैं। अधिकारी, जनप्रतिनिधि भले ही इस कड़वी सच्चाई को न स्वीकारें, लेकिन शहर के कुछ स्थानों पर सुबह लोगों को वाहन का इंतजार करते हुए देखकर इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता। शहर के मुख्य मार्ग पर राम मंदिर के पास, टैक्सी स्टैण्ड, झिलमिला चौक सहित शहर के बाहर बैतारी चौक के पास देर शाम अथवा तड़के सुबह काम की तलाश में पलायन करने वालों को देखा जा सकता है। गाँवों से पलायन रोकने के लिए शासन के द्वारा ग्रामीणों को रोजगार देने कई तरह की योजनाएँ लागू की गई हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का सही क्रियान्वयन न होने के कारण प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के भी मजदूर अन्य शहरों या प्रदेशों की ओर पलायन करते हैं। पलायन रोकने के लिए लागू कई योजनाएं भी ग्रामीणों को गांव में काम नहीं दिला पाई हैं। यदि कहीं काम हुए भी हैं तो वह पर्याप्त नहीं है। कहीं काम की कमी, तो कहीं समय पर मजदूरी नहीं मिलने जैसी शिकायतें अक्सर मिलती रहती हैं। इसी प्रकार की स्थिति से जूझते हुए ग्रामीण अब रोजगार की तलाश में अपना घर-बार छोड़कर शहरों की ओर कूच करने लगे हैं। ऐसा भी नहीं कि इस बारे में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जानकारी न हो, इसके बावजूद पलायन को आज तक रोका नहीं जा सका है।
प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल भी घाटे का सौदा
पलायन कर रहे कुछ लोगों ने नाम-पता न छापने की शर्त पर नवभारत को बताया कि बार-बार प्राकृतिक आपदाओं के कारण अब फसल लगाना भी घाटे का सौदा हो गया है। इसलिए फसल की अपेक्षा वे अन्य कार्यों की ओर अधिक जोर दे रहे हंै। पहले खरीफ मौसम में अच्छी फसल की उम्मीद रहती थी, लेकिन अब कभी अधिक बारिश तो कभी हवा, पानी की मार ने छोटे व निम्न वर्ग के कृषकों की कमर तोड़ कर रख दिया है। यही कारण है कि अब परिवार का पेट पालने के लिए उन्हें बाहर काम करने के लिए जाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाहर मजदूरी करने पर कम से कम एक निश्चित आमदनी का भरोसा तो रहेगा।

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काका खबरीलाल

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