पति-पत्नी ने बनाया ऐप एक क्लिक में आपके द्वार पहुंचेगी बोरवेल मशीन

अक्सर पति-पत्नी को जीवन रूपी गाड़ी का पहिया कहा जाता है। आज हम आपको ऐसी जोड़ी से मिलवा रहे हैं जो लाइफ ही नहीं बल्कि स्टार्टअप के भी पहिए बन चुके हैं। जिसे न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि देश के कई हिस्सों में रेस्पॉन्स मिल रहा है। जशपुर जिले के तपकरा निवासी राजेन्द्र-सरिता गुप्ता ने बोरवेल ऐप बनाया है। इसके जरिए आप सीधे बोर मशीन के ऑनर से जुड़ सकते हैं। यानी एक क्लिक ने बोरवेल वाले आपके द्वार। हाल ही में राजधानी के साइंस कॉलेज मैदान में इस दम्पती ने अपना स्टार्टअप एग्जीबिट किया था। गुप्ता दम्पती ने बताया कि हम किसान फैमिली से हैं। हमने रिसर्च किया कि किसान या कोई ऐसा व्यक्ति जो घर में बोर कराना चाहता है वह बोरवेल गाड़ी बुलाने के लिए माध्यम से बात करता है। इससे उसका चार्ज लगभग 30 प्रतिशत बढ़ जाता है। तब हमने तय किया कि क्यों न ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया जाए जिसमें बीच वाले लोग ही न हों। तब ऐप का आइडिया आया।यह ऐप फ्री है। बोर करवाने वालों के लिए कोई चार्ज नहीं है। हां बोरवेल गाड़ी वालों के लिए नॉमिनल चार्ज रखा है और वही हमारे स्टार्टअप का रेवेन्यू है। हम इस स्टार्टअप को ओला, ऊबर की तरह ऊंचाई पर ले जाना चाहते हैं।तीन ऐप हैं। दो ऑनर के लिए और एक यूजर के लिए। ऑनर अपनी लिस्टिंग के लिए बोरवेल ऑपरेटर ऐप डाउनलोड करेगा और सारी डिटेल भेजेगा। इसके बाद उसे बोरवेल ड्राइवर ऐप डाउनलोड करना होगा जहां से उसे काम मिलना शुरू होगा। जैसे ओला के ड्राइवर के पास मैसेज आता है उसी तर्ज पर ड्राइवर ऐप में कॉलिंग आएगी या मेसेज। पब्लिक के लिए एक ही ऐप है जिसका नाम है बोरवेल ऐप।राजेंद्र ने बताया, रायपुर में बीटीआई ग्राउंड स्थित शासकीय शिक्षा महाविद्याल से मैंने साल 2001 में बीएड किया। छत्तसीगढ़ को एमपी से अलग हुए एक साल ही हुआ था। संतोष चौबे आईसेक्ट के डायरेक्टर थे। उन्हें इंदिरा शक्ति सूचना योजना प्रोजेक्ट मिला था। उनसे मैंने काम लिया और कम्प्यूटर लाइन में डीपली वर्क करने लगा। इस स्टार्टअप के बाद अब रायपुर के जीवन विहार कॉलोनी में हमारी ऑफिस भी तैयार हो रही है। मैंने मास्टर ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी किया है। पत्नी का बहुत सपोर्ट रहा है। उन्होंने मुझे काफी प्रेरित किया।























