सरायपाली: भष्टाचार के भेट चढ़ गया चकरदा, नूनपानी का स्टॉप डेम

सरायपाली( काकाखबरीलाल). एकीकृत जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम परियोजना केदुवां विकासखंड सरायपाली के माइक्रो वाटरशेड के ग्रामों में स्वीकृत लाखों रुपए के स्टॉप डेम निर्माण कार्यों में निर्माण एजेंसी नवा बिहान समिति (एनजीओ) द्वारा जमकर अनियमितता किए जाने की जानकारी मिल रही है। शिकायतकर्ता अमरकोट निवासी कामता पटेल की शिकायत पर की गई जांच के दौरान गुणवत्ता विहीन निर्माण एवं भ्रष्टाचार की पोल खुल गई। जांच अधिकारी सहायक संचालक कृषि यूएस तोमर ने जांच प्रतिवेदन उपसंचालक कृषि को जमा किए 5 माह गुजर जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई अभी तक नहीं हो पाई है। जांच प्रतिवेदन में जल ग्रहण समिति जम्हारी, नूनपानी, अमरकोट, चकरदा, मुंधा एवं मोहदा में लाखों रुपए की स्टॉप डेम में जमकर भ्रष्टाचार किए जाने का पर्दाफाश हो चुका है। स्टॉपडेम निर्माण में भ्रष्टाचार एवं अनियमितता उजागर होने के बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने के कारण क्षेत्र की जनता में आक्रोश पनपने लगा है। शिकायतकर्ता ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर दोषी अधिकारियों एवं भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले कृषि विभाग के आला अफसरों पर कठोर कार्रवाई किए जाने की मांग संचालक कृषि विभाग रायपुर से की है। यह ज्ञातव्य हो कि एकीकृत जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन कार्यक्रम परियोजना केदुवां के अंतर्गत माइक्रो वाटरशेड के ग्रामों में विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए नवा बिहान समिति रायगढ़ को कार्य एजेंसी बनाया गया था जिसके परियोजना अधिकारी राजकुमार गुप्ता बनाए गए हैं। कार्य एजेंसी द्वारा स्टॉप डेम निर्माण में बरती जा रही अनियमितता की शिकायत की गई थी
करीब 42 लाख रुपए वसूली की अनुशंसा
जांच अधिकारी यू एस तोमर द्वारा 6 फरवरी 2021 को मौके पर पहुंचकर टीआर ध्रुव सर्वेयर, एसके श्याम सर्वेयर, बीआर पटेल कृषि विकास अधिकारी के साथ पुनः एक बार संरचनाओं का नाप जोख की गई। किंतु इतने समय उपरांत भी कार्य में कोई प्रगति नहीं पाई गई। परियोजना अधिकारी आईडब्ल्यूएमपी 09 राजकुमार गुप्ता के डब्ल्यूडीटी द्वारा किए गए मूल्यांकन एवं जांच अधिकारी द्वारा मौके पर जो वास्तविक स्थिति पाई उसमें काफी अंतर पाया गया है। जिसकी तुलनात्मक विवरण जांच प्रतिवेदन में प्रस्तुत की गई है। ग्राम जम्हारी में 12.40 लाख रुपए की लागत से बन रहे स्टॉप डेम को जहां निर्माण एजेंसी ने 8.78 लाख खर्च बताया है। वहीं जांच अधिकारियों द्वारा मात्र 5.49 लख रु का ही काम होना पाया। करीब 3.29 लाख की एनजीओ से वसूली की जानी है। इस तरह नूनपानी, अमरकोट, चकरदा, मुधा, मोहदा में 10 स्टॉपडेम के लिए 119.18 लाख रुपए की स्वीकृति मिली है। जिसमें से एनजीओ द्वारा 64.43 लाख रुपए खर्च होना बताया गया जबकि जांच अधिकारियों द्वारा जांच के दौरान भौतिक सत्यापन में पाया कि इसमें मात्र 22.52 खर्चा आया है। जांच प्रतिवेदन में करीब 41.91 लाख रुपए की वसूली करने की अनुशंसा की गई आंकी गई है।
शिकायतकर्ता कामता पटेल द्वारा की गई शिकायत पर जांच अधिकारी यूएस तोमर द्वारा जांच की गई। जांच प्रतिवेदन में बताया गया है कि जांच अधिकारी को न तो एनजीओ द्वारा सहयोग किया गया और न ही जांच दल के बाकी सदस्यों द्वारा सहयोग किया गया। जांच अधिकारी ने 3 नवंबर 2020 को आईडब्ल्यूएमपी 09 की परियोजना के ग्रामों में रिटायर्ड कृषि विकास अधिकारी बीआर पटेल को ले जाकर जांच कार्रवाई की गई। जांच अधिकारियों ने ग्राम जम्हारी, चकरदा, मुधा, मोहदा, अमरकोट, नूनपानी में स्वीकृत, निर्मित एवं निर्माणाधीन कार्यों का स्थल मुआयना करने पर गंभीर अनियमितता उजागर हुई है।
सूचना फलक का अभाव
किसी भी शासकीय कार्य को प्रारंभ करने के समय सूचना पटल लगाया जाना जरूरी है। मगर निर्माण एजेंसी द्वारा किसी भी स्टाप डेम के पास सूचना फलक नहीं लगाया गया है जबकि माइक्रो वाटरशेड कमेटी के सचिव ने जानकारी दी है कि कार्य प्रारंभ के समय सूचना फलक लगाया गया था मगर अत्यधिक पानी गिरने एवं चोरी होने की आशंका से अध्यक्ष के पास रखवाया गया है। निर्माण कार्यों में एनजीओ द्वारा मनमानी बरतते हुए प्राक्कलन को ताक में रखकर निर्माण कार्य को अंजाम दिया गया है।
छोटे से नाले पर बना रहे हैं बड़ा सा स्टॉपडेम
जांच अधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में स्टॉपडेम निर्माण में गंभीर अनियमितता बरती जाने का मामला उजागर किया गया है। उन्होंने बताया कि नूनपानी में जिस नाले पर स्टॉप डेम बनाया जा रहा है वह उपयुक्त नहीं है। संकरे नाले पर निर्माण साइट को चैड़ा कर बनाया जा रहा है। ग्राम नूनपानी के स्टॉप डेम 2 में कम स्टीमेट पर भी स्टॉप डेम बनाया जा सकता था मगर निर्माण एजेंसी द्वारा छोटे से नाले पर बड़ा स्टॉप डेम बनाकर फिजूल खर्च किया जा रहा है। इसी तरह अमरकोट में निर्माणाधीन स्टॉप डेम का डिजाइन साइड के अनुरूप नहीं पाया गया है। नाला तो काफी बड़ा है मगर नाले के आधे हिस्से में ही स्टॉप डेम बनाया जा रहा है। बाकी हिस्से में पानी का बहाव जारी है। ऐसे स्टॉप डेम बनाकर शासन की धनराशि का दुरुपयोग ही है। स्टॉप डेम के सहारे जहां किसानों की सिंचाई मिलनी चाहिए उनकी फसल लहलहा आनी चाहिए मगर इन स्टॉप डेमों के निर्माण से निर्माण एजेंसियों और कृषि विभाग के अफसरों की जेब गरम हो रही है।
गुणवत्ता विहीन निर्माण सामग्रियों का उपयोग
निर्माण एजेंसी द्वारा स्टॉपडेम निर्माण में उपयोग में लाई गई निर्माण सामग्रियों की गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा गया है। जल ग्रहण समिति चकरदा, मुधा, में निर्माणाधीन स्टॉप डेम में बहुत ही घटिया किस्म का रेत का उपयोग किया गया है। जिस नाला पर स्टापडेम बन रहा है उसी नाला का रेत का भी उपयोग किया गया है। गिट्टी की गुणवत्ता भी काफी खराब पाई गई है तथा सीमेंट रेत गिट्टी का अनुपात भी स्टीमेट के अनुरूप नहीं होना का उल्लेख किया गया है।

























