बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते हजार रुपए घूस मांगने का प्रकरण 18 सालों तक चला अदालत से पीड़ित के पक्ष में न्याय आया लेकिन न्याय सुनने वाला ही इस दुनिया को अलविदा कह चुका

ऐसे ही न्याय को कहते हैं बहुत देर कर दी मेहरबां आते-आते. हजार रुपए घूस मांगने का प्रकरण 18 सालों तक चला. अदालत से पीड़ित के पक्ष में न्याय आया लेकिन न्याय सुनने वाला ही इस दुनिया को अलविदा कह चुका है. बिलासपुर हाईकोर्ट ने 18 साल पुराने मामले में हाल ही में फैसला दिया है. इस प्रकरण में फरियादी को न्याय मिला है, लेकिन अपने साथ हुए न्याय को सुनने व देखने के लिए फरियादी जिंदा नहीं है. उसकी मौत कोर्ट के फैसला आने के 21 महीने पहले ही हो चुकी है. मरणोपरांत बीट गार्ड को हाई कोर्ट से न्याय मिला है. हाई कोर्ट ने निचली अदालत से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा (7),(13) के तहत सुनाई गई सजा को निरस्त कर बिट गार्ड को दोषमुक्त कर दिया है. अरविंद सिंह चंदेल की कोर्ट ने मामले में फैसला दिया है. प्रकरण के मुताबिक शिव प्रसाद जिला दुर्ग में सन 1999 में फॉरेस्ट बीट गार्ड के पद पर पदस्थ थे. उन्हें लकड़ी चोरी की सूचना मिली. बताये स्थान पर वह लकड़ी जब्ती के लिए पहुंचे. इस दौरान उनके खिलाफ ही एक शिकायत कर दी गई, जिसमें शिकायतकर्ता ने उनपर एक हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा दिया. शिव प्रसाद का मामला विशेष अदालत में चला, जहां से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा (7) धारा (13) के तहत उन्हें सजा सुनाई गई.
























