भिलाई

प्रदेश में हरियाली के लिए मशहूर इस शहर में , लूपर इल्ली का हमला सफाचट्ट हो गए पेड़ों के पत्ते

भिलाई (काकाखबरीलाल).   अपनी हरियाली के पूरे छत्तीसगढ़ में मशहूर भिलाई शहर इल्ली (पोइसीनिया लूपर) से परेशान हैं। बड़े-बड़े हरे-भरे पेड़ों की पत्तियों को कुछ ही घंटे में चट कर जाने वाली ये इल्लियां लोगों के लिए भी खतरनाक है। इससे त्वचा संबंधी गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। इसके हमले के कारण शहर की हरियाली गायब होने लगी है। इस पर नियंत्रण के लिए नगर निगम प्रशासन ने कृषि विभाग के विशेषज्ञों से मदद मांगी है।
इन दिनों शहर में हर तरफ इल्लियां बिलबिलाने लगी है। भिलाई-दुर्ग में बहुत तेजी से बढ़ रही इसकी संख्या लोगों के लिए नुकसानदायक है। हरी पत्तियां सफाचट हो जाने से बड़े-बड़े पेड़ भी ठूंठ में बदल जा रहे हैं। गुलमोहर और सहजन (मुनगा) में इसका प्रकोप सबसे ज्यादा है। जानकार बताते हैं कि पोइसीनिया लूपर अंडा, लार्वा, प्यूपा और इल्ली चार तरह से पनपती है। इल्ली की प्रजाति बेहद तेजी से बड़ा होता और बड़ी तेजी से अपनी संख्या बढ़ाती है। एक पेड़ पर ये इल्लियां हजारों की संख्या में मौजूद हैं, जो कुछ ही घंटों में सब कुछ खा जाती हैं।
त्वचा के लिए हानिकारक है
लूपर इल्ली के हमले से पेड़ों की शाख से लेकर तने और उसके आसपास की जमीन की भी हरियाली गायब होने लगी है। अन्य कीटों की तरह ही ये भी रेंगकर चल रही हैं। ये इल्ली त्वचा के लिए बहुत हानिकारक है। शरीर के जिस भाग पर भी गिरते हैं, वहां लाल चकते हो जाते है। ज्यादा खुजलाने पर फफोले निकल आते हैं। इस पर जल्द नियंत्रण जरूरी है, नहीं तो इसकी संख्या तेजी से और गुणात्मक रूप से बढ़ती ही जाएगी।
अंजोरा कृषि केंद्र में किया अध्ययन विशेषज्ञों ने सुझाए नियंत्रण के उपाय
दुर्ग के कृषि विस्तार अधिकारी अशोक शर्मा ने बताया कि कृषि विज्ञान केंंद्र सरगुजा, पाहंदा आदि के विशेषज्ञों से इस संबंध में सलाह ली। अंजोरा स्थित केंद्र में इस इल्ली का परीक्षण कर संपूर्ण जानकारियां जुटाई गई। विशेषज्ञों ने आपसी राय के बाद इसके उन्मूलन के लिए कीटनाशक सुझाए हैं। प्रोफेनोफॉस प्लस साइफर के छिडकाव से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। प्रोपेनाफॉस इसे ऊपर आने से रोकता है और साइफर इल्ली पर अटैक कर इसके ग्रोथ को रोक देता है।
फूट स्पेयर से छिड़काव करना ठीक रहेगा
विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ों पर कीटनाशक का छिड़काव फूट स्पेयर से करना ठीक होगी। इससे पूरे पेड़ की ऊंचाई तक दवा का छिड़काव हो सकेगा तथा दूरी बनी रहने से इल्ली को छिड़काव करने वाले के ऊपर गिरने का डर नहीं रहेगा।

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छत्तरसिंग पटेल

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