
रायपुर@काकाखबरीलाल। आजादी का अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में भारतीय इतिहास संकलन समिति प्रांत छत्तीसगढ़ एवं भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा छत्तीसगढ़ के राजधानी के होटल क्लब पराइसों में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी 6 से 8 अगस्त तक आयोजित किया गया जिसका शीर्षक “स्व का संघर्ष: स्वाधीनता आंदोलन विशेष संदर्भ में किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में लगभग 300 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए जिसमें देश के 13 राज्य सहित विदेश से थाईलैंड एवं वियतनाम के शोधार्थी सम्मिलित हुए। इस अवसर पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययन शाला के छात्र विरेंद्र कुमार ने “माटी पुत्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी: स्वर्गीय श्री रामलाल चंद्राकर” शीर्षक पर शोध पत्र प्रस्तुत किया गया। छात्र विरेंद्र कुमार के द्वारा प्रस्तुत शोध पत्र में बताया गया कि स्व. रामलाल चंद्राकर रायपुर क्षेत्र के खरोरा थाना अंतर्गत ग्राम खौली के • निवासी थे। इनमें बाल्यकाल से ही राष्ट्र भक्त के व्यापक गुण थे, 12 साल की उम्र में पढ़ाई के साथ साथ रायपुर में ये पिकेटिंग का कार्य करते थे, इसी दौरान यहां अंग्रेजी हुकूमत के चलते पुलिस द्वारा लाठीचार्ज कर दिया गया जिसमें इनके सिर पर चोट आई और इन्हें गिरफ्तार कर महासमुंद की जंगल में छोड़ दिया गया। रामलाल जी जैसे तैसे अपने प्राण की रक्षा कर अपने गृह ग्राम खौली आ गए लेकिन देशभक्ति नहीं त्यागी और बढ़ती उम्र के साथ साथ वे महात्मा गांधी जैसे विभूतियों से स्वतंत्र भारत की प्रेरणा लेकर उनके आंदोलनों को अपने क्षेत्र में प्रमुखता से नेतृत्व किया। इनमें भेष बदलने एवं गुप्तचर का कार्य करने में महारत हासिल थी, इन गुणों के कारण ये कभी भी अंग्रेजों के हत्थे नहीं चढ़े। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सन 1977 से 1980 तक जनता दल पार्टी से मंदिर हसौद विधानसभा के प्रथम विधायक एवं सहकारिता राज्य मंत्री थे। क्षेत्र में यह स्वतंत्रता सेनानी “मंत्री जी” के नाम से व्याख्यात है। इनके अतुलनीय देशभक्ति और कर्तव्य परायणता के लिए 9 अगस्त 2006 तथा 9 अगस्त 2008 को “अगस्त क्रांति “दिवस के अवसर पर क्रमशः राष्ट्रपति महामहिम डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम व राष्ट्रपति महामहिम श्रीमति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल द्वारा सम्मानित किया गया। ये 27 जून 2009 को ये ब्रह्मलीन हो गए, मृत्युपरांत इनके सम्मान में इनके गृह ग्राम खौली के सरकारी स्कूल का नाम इनके नाम पर रख दिया गया। इस प्रकार इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में छात्र विरेंद्र कुमार द्वारा क्षेत्र के अल्पज्ञात इस महान स्वतंत्रता सेनानी का अंतरराष्ट्रीय मंच से लोगों के बीच शोध पत्र का वाचन किया गया, तथा निष्कर्ष के तौर पर बताया गया कि इनके जैसे बहुत से स्वतंत्रता सेनानी अभी भी गुमनामी में हैं, जिनकी निरंतर तलाश कर इन्हें तथा इनके कार्यों को जनसामान्य तक लाने का प्रयत्न करना चाहिए, जिससे देश के प्रति इनके कार्यों को समुचित सम्मान प्राप्त हो ।
























