रायपुर

महिला समूह को 9 महीने से सैलरी नहीं मिली है, उधार लेकर घर चलाने को मजबूर

रायपुर (काकाखबरीलाल). गोधन न्याय योजना राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है. इस योजना की शुरुआत से ही सरकार ने खूब वाहवाही लूटी और छत्तीसगढ़ गोबर की खरीदी करने वाला पहला राज्य भी बन गया, लेकिन अब स्थिति कुछ अलग है. रायपुर के डंगनिया स्थित गोठान में काम करने वाली महिलाओं को बीते 9 महीने से सैलरी नहीं मिली है, वे लॉकडाउन के इस दौर में घर चलाने की स्थिति में भी नहीं है, वे दूसरों से उधार लेकर घर चलाने को मजबूर है.

गोठान में काम करने वाली महिलाएं कहती है कि काम तो भरपूर लिया जाता है और जब बात सैलरी की आती है तो महज आश्वासन ही दिया जाता है. गोठान में काम करने वाली कुछ महिलाओं के कंधों पर पूरे घर का खर्चा चलाने की जिम्मेदारी भी है. गणेशिया कहती है कि 9 महीने से गोधन न्याय योजना की सैलरी नहीं मिली है. हालत बहुत ज्यादा खराब है पति भी कुली का काम करते हैं, उनका काम भी बंद है.

ललिता साहू ने कहा कि जब हम सैलरी के लिए कहते हैं तो कहा जाता है कि आ जाएगी लेकिन हम पर ध्यान ही नहीं दिया जा रहा है. घर वाले भी कमाते नहीं है, ऐसे में उधार लेकर घर चलाना पड़ रहा है लेकिन वह भी कब तक चलेगा पता नहीं.

गौरतलब है कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 20 जुलाई 2020 से राज्य में गोधन न्याय योजना लागू की थी. इस योजना के तहत पशुपालकों से गोबर की खरीदी की जाती है और इस गोबर से गोठानों में वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जाता है. छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना का संचालन सुराजी गांव योजना के तहत गांव-गांव में निर्मित गोठानों के माध्यम से किया जा रहा है. इन्हीं गोठानों में गोधन न्याय योजना के तहत वर्मी कंपोस्ट टांकों का निर्माण किया गया है, जिनमें स्व-सहायता समूहों की महिलाएं जैविक खाद का निर्माण कर रही हैं, लेकिन कुछ गोठानों की व्यवस्थाएं चरमरा गई है.

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छत्तरसिंग पटेल

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