छत्तीसगढ़रायपुर

संस्कृति को बरकरार रखने बनाई ‘मोर माटी मोर गोठ’ नामक शार्ट मूवी

रामकुमार नायक काका ख़बरीलाल रायपुर

ए-फाइव प्रोडक्शन ने बनाई छत्तीसगढ़ी फ़िल्म

रायपुर। आज के नए आधुनिक युग मे युवा अपनी संस्कृति को भूलने लगे है। कहते है एक मनुष्य की पहचान उसकी संस्कृति से होती है। फिर भी लोग अपनी संस्कृति से दूर भागते नजर आते है। वैसे तो छत्तीसगढ़ को कला का प्रदेश भी कहा जाता है। जहां रीति-रिवाज, भाषा शैली, बोलियां हमारी विरासत हैं। फिर भी हम इसे अपनाने के लिए कतराते है। जबकि दूसरे राज्य में युवा अपने प्रान्त की संस्कृति को छोड़ते नही।
इसी उद्देश्य से ए-फाइव प्रोडक्शन के द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा मे ‘मोर माटी मोर गोठ’ की शार्ट मूवी बनाई गई। जिसमें कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के छात्रों ने भाग लिया और अपनी संस्कृति को बरकरार रखने शार्ट फ़िल्म बनाने में आगे आएं। जो इनदिनों कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के लिए काफ़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। सोसल मीडिया,यूट्यूब चैनल में भी लोग उत्सुकता के साथ शार्ट मूवी देख रहे हैं।

गौरतलब है कि ‘मोर माटी मोर गोठ’ में मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के संस्कृति को बरकरार रखने व अपने मातृभूमि व मातृभाषा को न भूलने शार्ट फ़िल्म बनाया गया है। उक्त फ़िल्म में डायरेक्टर आदित्य ताम्रकार, अजय श्रीवास्तव, प्रोड्यूसर अखिल शर्मा, आदित्य त्रिपाठी, अंकित चंद्राकर, दीपक साहू, रोशन कुमार, वासुदेव साहू, हिमांशू चंद्राकर, नेहा सिंह, शिवांगी मिश्रा, योगिता साहू, निरुपमा पन्ना, सारंग ताम्रकार, बालेश्वर श्रीवास्तव आदि का सहयोग रहा।

शिक्षित युवक लखन की कहानी
मोर माटी मोर गोठ मूवी में पढ़े लिखे लड़के लखन की कहानी है। पिता अपने बेटे को उच्च शिक्षा देने शहर भेजता है। जहां जाकर वे अपने मातृभूमि को भूलने लगता है। मां के प्रेम अपने बेटे से बात करने बेताब रहती है। जिसके बाद सपरिवार कॉलेज पहुंचते है। लखन उन्हें अचानक देख आक्रोशित हो जाता है और गांव वाली भेषभूषा के कारण दोस्तो के सामने पहचानने से इंकार करता है। एक दिन ऐसा आता है जब लखन को पैसे की जरूर पड़ती है तब वह मां-बाप को याद करते हुए वापस गांव की ओर आता है। वहीं खेतों में काम कर रहे बचपन के दोस्तों को नजर अंदाज करते हुए शहर में रहने का रौब झाड़ने लग जाता है और बड़े कम्पनी में नौकरी लगने की बात करता। लखन जिस कंपनी में नौकरी के लिए पहुंचता है दरसल उस कंपनी के बॉस उसी के गांव में रहने वाला निकलता है जिसे खेतो में देहाती शब्द से संबोधित किया होता है। तब जाकर लखन को अपने संस्कृति और मातृभूमि व भाषा बोली का अहसास होता है।

सोसल मीडिया में छाया छत्तीसगढ़ी शार्ट फिल्म
केटीयू के छात्रों द्वारा बनाई शार्ट मूवी को छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ बसना के अध्यक्ष प्रकाश सिन्हा ने बताया कि सोसल मीडिया में ‘मोर माटी मोर गोठ’ मूवी इन दिनों जमकर छाया हुआ हैं। आज के फैसन जमाने मे पढ़े लिखे लोग मातृभाषा व मातृभूमि को भूलने लगे है। यह शार्ट मूवी बाहर में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स व शिक्षित लोगों के लिए कॉफी असरदायक होगा। युवा पीढ़ी अपने प्रदेश की संस्कृति को न भूलने का मैसेज देने व सकारात्मक पहल करते हुए मूवी बनाने के लिए डायरेक्टर का आभार व्यक्त किया।

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Ramkumar Nayak

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