मोबाइल ऐप के माध्यम से ठगों ने लुट लिए 1 लाख रुपये

(रायपुर काकाखबरीलाल).
प्राइवेट कंपनी के इंजीनियर से ठगों ने एक लाख 32 हजार की ऑनलाइन ठगी कर ली। इंजीनियर के खाते से पैसे सात किश्तों में निकाले गए। पैसे निकलने के तीन दिन बाद इंजीनियर के मोबाइल पर ट्रांजेक्शन का मैसेज आया। तब उन्हें ठगी का पता चला। उन्होंने तुरंत अपना खाता ब्लॉक करवाया और पुलिस में शिकायत की। साइबर सेल से रिपोर्ट मिलने के बाद खमतराई पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। बैंक से ट्रांजेक्शन की जानकारी मांगी गई है।
पुलिस अफसरों ने बताया कि आरवीएच कॉलोनी के जोहन पटेल गोदरेज कंपनी में इंजीनियर हैं। उन्हें कंपनी का कुछ पार्टस कोरियर करना था। उन्होंने इंटरनेट पर कोरियर कंपनी को सर्च किया, जो लॉकडाउन में भी अपनी सर्विस दे रही है। उन्हें फाफाडीह की तिरुपति कोरियर कंपनी का नंबर मिला। इंजीनियर ने उस नंबर पर कॉल किया। फोन किसी युवक ने रिसीव किया। उसने इंजीनियर को क्विक सपोर्ट एप मोबाइल पर डाउनलोड करने के लिए कहा। उन्होंने एप डाउनलोड किया और उसमें अपना नंबर रजिस्टर कर लिया। उसके बाद ही उनके खाते से 7 किश्त में 1.32 लाख दूसरे खाते में ट्रांसफर हुए है। खाते पैसे ट्रांजेक्शन होने के तीन दिन बाद उनके मोबाइल पर मैसेज आया। मैसेज देखने के बाद वे हड़बड़ा गए और खाते का स्टेटमेंट निकलवाया। उन्हें ठगी का पता चला। उन्होंने पहले एप को अनस्टॉल किया। उसके बाद खाता ब्लॉक कराया। खमतराई टीआई रमाकांत साहू ने लोगों से अपील की है कि बैंकिंग से संबंधित सेवा लेने वाले दो मोबाइल नंबर का उपयोग करें। बैंक में जो मोबाइल नंबर लिंक या रजिस्टर है। उस नंबर से आम लोगों से बातचीत या किसी तरह का इंटरनेट सेवा से न जुड़े। इस तरह की सेवा के लिए अलग नंबर का उपयोग करें, क्योंकि बैंक में रजिस्टर मोबाइल नंबर से आसानी से पैसों का ट्रांजेक्शन किया जा सकता हैं। मोबाइल नंबर से खाते को हैक किया जा सकता हैं। मोबाइल पर कोई भी एप डाउनलोड करते समय पहले उसकी जानकारी प्राप्त कर लें। वह एप किस काम के लिए बनाया गया है। उसका फायदा, उपयोग क्या है। पुलिस ने बताया कि इंटरनेट में किसी भी कंपनी का नंबर या कस्टमर केयर नंबर ढूंढते समय सावधानी बरतें। क्योंकि ठगों ने बड़ी-बड़ी कंपनी के नाम से भी अपना नंबर इंटरनेट पर अपलोड किया है। उसमें कॉल करने वाले ठगों के जाल में फंसकर ठगी का शिकार हो रहे हैं। इसलिए लोगों को सावधानी और सतर्क रहने की जरूरत हैं। कंपनी के होम पेज में ही जाकर नंबर निकाले। किसी भी नंबर पर कॉल न करें। अगर नंबर पर कॉल कर रहे हैं तो एक बार क्रॉस कर लें। अगर किसी तरह का मैसेज आता है या एप डाउनलोड करने को कहा जाता है तो समझ जाए की वह फर्जी है। ओटीपी का मैसेज आ
है या एप डाउनलोड करने को कहा जाता है तो समझ जाए की वह फर्जी है। ओटीपी का मैसेज आ रहा है तो बिल्कुल भी न बताएं। पुलिस के अनुसार ठग लगातार ठगी का तरीका बदल रहे हैं। नए-नए तरीके से लोगों को झांसे में ले रहे हैं। उनका तरीका इतना पेशेवर है कि पढ़े-लिखे लोग भी झांसे में आ रहे हैं।

























