
कीचड़ भरे रास्ते से होकर गुजरते है आंगनबाडी के नैनिहाल बच्चे
पिने के लिए पानी नहीं शौचालय के लिए कहाँ से लाए
हेमन्त वैष्णव –
ग्रामीण क्षेत्रो में सरकार द्वारा लाखो रु खर्च कर नल जल योजना और पानी निकासी के लिए नाली निर्माण करवाया जा रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर देखरेख के अभाव में कुछ योजनाएं धरी की धरी रह जाती है जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है
ताजा मामला ग्राम पंचायत पौसरा का है गाँव में नल जल योजना संचालित है आँगन बाड़ी केंद्र के सामने से नल जल और घरो से निकलने वाला गन्दी पानी मुख्य मार्ग में बहते हुए आँगन बाड़ी भवन के सामने ही दरवाजा से होकर कीचड़ सहित बहता है और इसी कीचड़ भरे मार्ग से होकर रोज गाँव के आँगन बाड़ी के नैनिहाल बच्चे गुजरते है
ग्राम पंचायत में पानी नीकासी के लिए कुछ वार्डो में नाली का निर्माण तो कराया गया है लेकिन नाली का साफ़ साफाई नहीं होंने के कारण घरो और नल जल से निकलने वाला पानी नाली में ही जाम हो रहा है इसका मुख्य कारण ग्रामीणों द्वारा कचड़ा को नाली में ही डाला जाना बताया जा रहा है
वही पौसरा में फोर लाइन के पास मोहल्ले में नल जल योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है टंकी भी बनाया गया है लेकिन टंकी और नल जल दोनों में पानी का सप्लाई बन्द बताया जा रहा है जिससे मोहल्ले वासियो को बहुत जादा परेसानी का सामना करना पड रहा है
पिने के लिए पानी नहीं शौचालय के लिए कहा से आए
जानकारों के अनुसार सौचालय में एक आदमी को दिन भर में 8 लीटर पानी का साधारण मात्रा में उपयोग होता है ऐसे में एक घरो में प्रति दीन सौचालय और घरो में पिने बर्तन साफ़ सफाई के लिए
ग्रामीण क्षेत्रो में नाडेप टैंक और और डस्टबिन का उपयोग नहीं किया जा रहा है सिर्फ सो पीस बनकर रह गया है ग्रामीण क्षेत्र में स्वच्छता अभियान कागजो पर ही सिमट कर रह जा रहा है
नाली में कीचड़ के सांथ गन्दा पानी जाम होने के कारण मच्छड़ भी पनप रहा है जिससे ग्रामीण क्षेत्र में घरो के बाहर निकलकर बैठना चौक चौराहा पर मुश्किल हो जाता है
ग्राम पंचायत द्वारा साफ साफाई में कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है है ग्रामीणों द्वारा बताया गया की नाली की सफाई के लिए ग्राम पंचायत सक्रिय नहीं है और बताया गया की घर के महिलाए भी कचड़ा को नाली में डाल रहे है जबकी कचड़ा के लिए अलग नाडेप टैंक ग्राम ग्राम पंचायतो में उपलब्ध है और नाडेप टैंक निर्माण के लिए हाजरो खर्च किए जा रहे है लेकिन उपयोग नहीं हो पा रहा है

























