जमनीडीह
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छत्तीसगढ़
क्षेत्र के उभरते कवि राकेश चतुर्वेदी की कलम से लिखित कविता : “धरती के प्यास बुझागे रे संगी”
काकाखबरीलाल, बसना(जमनिडिह) धरती के प्यास बुझागे रे सँगी, परत के देखतो पानी। खाय बर दाना जगाले रे सँगी, चार दिन…
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काकाखबरीलाल, बसना(जमनिडिह) धरती के प्यास बुझागे रे सँगी, परत के देखतो पानी। खाय बर दाना जगाले रे सँगी, चार दिन…
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