बसनामहासमुंद

हसदेव अरण्य : हसदेव अरण्य के समर्थन में यूथ यूनियन कर्राभौना के युवाओं ने किया प्रदर्शन,सेव हसदेव की हाथों में तख्ती लिये लगाये जमकर नारे

 

बसना@काकाखबरीलाल। आदिवासियों की जल जंगल और जमीन की लड़ाई आदिकाल से चली आ रही है। लाखों की संख्या में पेड़ों को कटने से बचाने हसदेव अरण्य के आदिवासी ग्रामीण महीनों भर से आंदोलन कर रहें है इन्हीं के समर्थन में आज महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक के ग्राम कर्राभौना यूथ यूनियन के सदस्य और गांव के आदिवासी युवाओं के साथ हसदेव के आदिवासियों का समर्थन देने सेव हसदेव की तख्ती लिए हाथों में तख्ती लिए नजर आए।
आदिवासियों के हसदेव बचाव समर्थन में उतरे युवाओं के हाथों में हसदेव बचाव- आदिवासी बचाव-जंगल बचाव लिखा हुआ तख्ती राष्ट्रीय राजमार्ग को मिलाने वाली बसना – भंवरपुर सड़क पर लोगों को जागरूक करते और आदिवासियों के समर्थन करते नजर आये।

क्या है मामला

हसदेव अरण्य एक घना जंगल है, जो 1,500 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के आदिवासी समुदायों का निवास स्थान है इस घने जंगल के नीचे अनुमानित रूप से पांच अरब टन कोयला दबा है। इलाके में खनन बहुत बड़ा व्यवसाय बन गया है, जिसका स्थानीय आदिवासी लोग विरोध कर रहे हैं।

हसदेव अरण्य जंगल को 2010 में कोयला मंत्रालय एवं पर्यावरण एवं जल मंत्रालय के संयुक्त शोध के आधार पर 2010 में पूरी तरह से ‘नो गो एरिया’ घोषित किया था‘’ उसके बाद अब राज्य सरकार के संरक्षण में वहां पेड़ों की कटाई शुरू हो चुकी है जिसमें लाखों पेड़ों की कटने का संभावना है।
बीते कुछ दिनों से प्रदेश के हसदेव अरण्य को लेकर देशभर में चर्चा बनी हुई है मुद्दा पर्यावरण संपदाओं से अच्छादित इस वन में वनों की कटाई और खनन से जुड़ा है, जिसे लेकर हसदेव के स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों में भारी रोष है। पिछले दिनों हसदेव में वनों की कटाई शुरु हुई तो सोशल मीडिया पर कई मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली तस्वीरें वायरल हुईं। ग्रामीणों समेत कई सामाजिक व प्रकृति प्रेमी संस्थाएं इन दिनों अंधाधुंध हो रही इन वनों की कटाई को लेकर विरोध प्रदर्शन व धरने दे रही हैं। एक अनुमान के मुताबिक लगभग हसदेव में दो से ढाई लाख पेड़ो के कटने की संभावनाएं है जिसे लेकर वहां के आदिवासी कई महीनों से आंदोलन रत है जिसकी जानकारी ग्राम कर्राभौना यूथ यूनियन के आदिवासियों युवाओं को हुई युवाओं ने उनके समर्थन में अपने स्तर में कुछ करने का सोंचा और जिससे पेड़ों को बचाने और आदिवासियों के हक लिए यह जागरूक युवा हाथों में सेव हसदेव का तख्ती लिए सड़क में जागरूकता एंव हसदेव के आदिवासियों का समर्थन करते नजर आये।

एक छोटे से गांव के युवाओं का इस प्रकार प्रदर्शन करना और लोगों को हसदेव अरण्य की जानकारी देना अपने आप मे एक जागरूकता का परिचय है। युवाओं ने बताया कि कैसे उन्होंने शोशल मीडिया पे देखा कि कैसे हसदेव के आदिवासी अपने जंगलों को बचाने कितना मेहनत कर रहें है इनके समर्थन में अपने स्तर में जितना हो सके हम युवा कर रहें है और युवाओं ने छत्तीसगढ़ सरकार से निवेदन किया कि अतिशीघ्र आदिवासियों के हक में फैसला ले और सरकार अडानी को दिए गए अनुमति को रद्द करे।

हसदेव बचाव के समर्थन में उतरे युवाओं में यूथ यूनियन के अध्यक्ष निलमडी सिदार, उपाध्यक्ष विजय कुमार चौहान, गोविंद सिदार, देवप्रकाश सिदार, नवरतन सिदार, हेमलाल सिदार, योगेश सिदार, कृष्णा निषाद, मन्नूलाल सिदार, धनेश सिदार, परकोल से वासुदेव सिदार, झनक सिदार आदि युवा उपस्थित थे।

AD#1

काका खबरीलाल

हर खबर पर काकाखबरीलाल की पैनी नजर.. जिले के न. 01 न्यूज़ पॉर्टल में विज्ञापन के लिए आज ही संपर्क करें.. kakakhabarilaal@gmail.com

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!