
राजिम(काकाखबरीलाल)। दबा बल्लू’ ये शब्द जितना पढ़ने सुनने में छोटा लग रहा है, उतना ही छत्तीसगढ़ के कई गांवों में मुसीबत बना हुआ है। अब आप ये सोच रहे होंगे कि ’दबा बल्लू’ कहना कैसे मुसीबत बन सकता है। तो चलिए हम आपको बताते हैं ये शब्द लोगों के लिए कैसी-कैसी मुसीबतें खड़ी कर रहा है। दरअसल बीते दिनों रायपुर जिले के एक गांव के सरपंच और सचिव ने फरमान जारी करते हुए कहा था कि ’दबा बल्लू’ कहने पर 5551 रुपए जुर्माना देना होगा। वहीं, दूसरी ओर कल आरंग के बनरसी में मड़ई मेला के दौरान ’दबा बल्लू’ नहीं कहने पर एक युवक की जमकर धुनाई हो गई।
मिली जानकारी के अनुसार रायपुर से लगे आरंग के बनरसी में मड़ई मेला के दौरान पांच लोगों ने मिलकर एक युवक को जमकर पीटा। पुलिस के मुताबिक आरोपी युवक मड़ई आए युवक से दबा बल्लू बोलने के लिए कह रहे थे और उसके इनकार करने पर आरोपियों ने उसे जमकर पीटा। पुलिस ने सभी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
इससे पहले धरसींवा के कांदुल गांव में दबा बल्लू कहने वालों के लिए फरमान जारी किया गया था। गांव के सरपंच और पंचायत सचिव ने मिलकर आदेश जारी किया कि मड़ई मेला में किसी तरह की मारपीट, लड़ाई या दबा बल्लू जैसे संवाद बोलने पर 5,551 रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा।
इसी तरह पलारी, बालोद, बेमेतरा के ग्रामीण इलाकों में भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। ग्राम पंचायत की ओर से इस गाने को बजाने या गाने पर 5 हजार का जुर्माना लगाया है। हालांकि इस तरह का जुर्माना लगाना कितना जायज है, यह बहस का विषय हो सकता है, लेकिन शायद पहली बार है जब छत्तीसगढ़ में किसी गाने को अश्लीलता का पर्याय मान कर उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाया जा रहा है।
वैसे तो छत्तीसगढ़ी गानों और फिल्मों में लोक संस्कृति की अपनी ही मिठास देखने को मिलती रही है, लेकिन इन दिनों मुंबइया मसाला गानों की तर्ज पर यहां भी गाने बनने लगे हैं। ऐसा ही एक गाना ‘दबा बल्लू’ इन दिनों यूट्यूब पर काफी पसंद किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर कुछ जगहों पर ऐसे गानों का विरोध भी किया जा रहा है।























