अजीब शौक: पीढ़ियों से कर रहे डाक टिकटों और नोटों का संग्रहण, मौजूद हैं 1940 की टिकट

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला मुख्यालय में रहते हैं श्याम सुंदर अग्रवाल। उनके पास एक पैसे से लेकर ₹50 तक के साथ ही ढेर सारी विदेशी डाक टिकटों का संग्रहण है। इन टिकटों में भूटान देश की डाक टिकट की रेशमी कपड़ों में कलात्मक कारीगरी के साथ मेटल में जारी की गई संभवतः विश्व में अपने तरह की अलग टिकट रही होगी। जिसे सिर्फ भूटान ने जारी किया था। साथ ही इनके पास लगभग 500 ऐसे नोट हैं जिनका सीरियल नंबर दुर्लभ माना जाता है। इसके साथ ही इनके पास ऐसे नोट भी मौजूद हैं जिस की छपाई सही ढंग से नहीं हुई है।
पहले वे डाक टिकटों के संग्रह के शौकीन थे। पर अब चिट्ठी का जमाना तो रहा नहीं तो डाक टिकटें मिलना बंद हो गई हैं। लेकिन इस बुजुर्ग का शौक खत्म नहीं हुआ। अब श्याम सुंदर दुर्लभ नंबरों के नोटों का संग्रहण कर रहे हैं। इनके पास दुर्लभ अंकों वाले रुपयों का अच्छा खासा संकलन मौजूद है। श्याम सुंदर को यह शौक विरासत में मिला है। उनके पिता भी ऐसी वस्तुओं के शौकीन थे। इनके पास डाक टिकट, पुराने रजिस्टर्ड पत्र, पोस्टकार्ड, दुर्लभ सिक्के, त्रुटिपूर्ण छपे नोट और दुर्लभ अंको के नोटों का अनुपम संग्रहण मौजूद है। डाक टिकटों के संग्रहण में इनके पास 1940 से टिकटें संग्रहित हैं। इनके संग्रहण में एक ऐसी डाक टिकट भी है जो अब दुर्लभ है। यह टिकट एशियाई खेलों के समय जारी किया गया था। जिसमें महाभारत का प्रसंग है। इस टिकट में श्रीकृष्ण को धनुष चलाते दिखाया गया है और अर्जुन बगल में खड़े हैं, जबकि होना यह था कि अर्जुन को धनुष चलाते दिखाया जाना था और श्रीकृष्ण को बगल में खड़े होना था। डाक विभाग की गलती से यह टिकट छप गया तब जाकर भूल का एहसास हुआ। ऐसे में इस टिकट को जारी नहीं किया गया। देश विदेश के करीब एक लाख मूल्य से ऊपर की डाक टिकटें इन्होंने संग्रहण कर रखी हैं। जिसमें संपूर्ण भारत की झांकी परिलक्षित है। स्वतंत्रता सेनानी, नेताओं, महापुरुषों, धार्मिक, सांस्कृतिक एकता, संधि मैत्री, चलचित्र, खेलों व पुरस्कारों के उपलक्ष में जारी होने वाले टिकटों का भी संग्रहण है























