छत्तीसगढ़महासमुंद

सौर सामुदायिक सिंचाई पंप की स्थापना कर अछोला गांव के लगभग सौ किसानों द्वारा 67 हेक्टेयर खेतों में कर रहे है पानी सिंचाई

काकाखबरीलाल महासमुंद:> पावर फाईनेन्स कार्पोरेशन (भारत सरकार का उपक्रम), नई दिल्ली के पहल एवं वित्तीय सहयोग से क्रेडा विभाग द्वारा जिले के ऐसे स्थलों जहां स्टाप डैम, बैराजों एवं ऐसे जल स्त्रोंतों जहां पर्याप्त मात्रा में सरफेस वाटर उपलब्ध है, वहां सौर सामुदायिक सिंचाई योजना के माध्यम से सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंप के साथ-साथ सिविल अधोसंरचना एवं पाईप लाईन विस्तार कर सिंचाई कार्य किया जा रहा हैं।

क्रेडा विभाग के सहायक अभियंता श्री नंदकुमार गायकवाड़ ने बताया कि जिन कृषकों के पास कृषि हेतु भूमि तो उपलब्ध है, किंतु सिंचाई हेतु उचित व्यवस्था नहीं है, ऐसे कृषक अपने कृषि भूमि के निकट जल स्त्रोत, जैसे नदी नाला उपलब्ध होने पर डीजल, केरोसीन पंप स्थापित कर सिंचाई हेतु जलापूर्ति करते हैं, या तो जल स्त्रोत उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उन्हें पूरे साल वर्षा का इंतजार करना पड़ता, जिससे कृषि कार्य पूरी तरह खत्म हो जाता है और फसल क्षति हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में ग्राम अछोला स्थित है, जहां समोदा बैराज में सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध रहता है परन्तु स्थल, विद्युत बाधित होने एवं डीजल पंपों में आवश्यकता से अधिक व्यय होने के कारण ग्राम अछोला के किसान समोदा बैराज के जल का समुचित उपयोग सिंचाई हेतु नही कर पाते थे। ऐसे में सिंचाई के लिए बारिश की उम्मीद में आसमान की ओर ताक रहे ग्राम अछोला एवं आसपास के किसानों को अब संजीवनी मिल गई है। अब यहां के किसानों को सिर्फ मानसूनी बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, क्योंकि क्रेडा द्वारा पॉवर फायनेंस कॉरर्पोरेशन लिमिटेड (भारत सरकार का उपक्रम) के वित्तीय सहयोग से 10 एच.पी. क्षमता के 4 नग सोलर सामुदायिक सिंचाई पंप (सोलर पंप) स्थापित किया गया है, जिसमें लगभग 11500 मीटर पाईप लाईन बिछाकर समोदा बैराज का पानी कृषक के खेतों में पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां से 57 खाताधारी 99 कृषकों द्वारा इस योजना का लाभ लेकर लगभग 67 हेक्टेयर खेतों में पानी सिंचित कर रहे है। इससे अब किसानों को बड़ी राहत मिली है व आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहे हैं। 

सहायक अभियंता ने बताया कि इस योजना के बाद किसानों को विद्युत के लिए किसी भी प्रकार का बिजली बिल नहीं देना पड़ेगा, इससे सरकार को बिजली बचत करने में भी मदद मिलेगी व किसानों को अनावश्यक खर्चाें से मुक्ति भी मिलेगी। इस योजना के तहत पंप स्थापित करने से औसत लगभग प्रतिदिन 150 से 160 यूनिट अर्थात माह में 4500 से 4800 यूनिट तक की बिजली की बचत होती है। जिसकी अनुमानित बचत राशि प्रतिमाह 22500 से 24000 तक होगी, अर्थात लगभग 2421 किलो कोयला की बचत एवं कोयले की जलने से उत्सर्जित होने वाले कॉर्बन डाईआॅक्साईड, धुंए से मुक्ति मिलेगी।

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