
रामकुमार नायक काका ख़बरीलाल रायपुर
उपभोक्ता फोरम ने दिया छात्राओ के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला।
रिपोर्टर – हेमन्त वैष्णव
रायपुर। कंप्यूटर की पढ़ाई के लिए पूरा फीस लेने के बाद छात्राओं को सुविधाएं नहीं देने के मामले में कचहरी चौक स्थित प्रमिला गोकुल दास डागा कालेज प्रबंधन के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम ने 2.51 लाख मुआवजा देने का फैसला दिया है। कालेज प्रबंधन को यह मुआवजा रकम दिसंबर 2015 से 9 प्रतिशत ब्याज के साथ देना होगा।
रायपुर के 13 छात्राओ ने लगाया था आरोप
श्रीमती मंजू वैष्णव कुमारी अलका साहू श्वेता वैष्णव कविता सोनवानी भावना वर्मा सोनिया साहू चमेली राजपूत कुमारी अंकिता पांडे संगीता वर्मा चितरंगी भारती ललिता वर्मा शशि प्रभा वर्मा रमा नायडू
रायपुर जिला उपभोक्ता फोरम ने कालेज प्रबंधन के इस कृत्य को सेवा में कमी और अव्यावसायिक व्यवहार मानते हुए फैसला सुनाया। केस के अनुसार डागा कालेज में 2004-15 में 40 छात्राओं ने पीजीडीसीए कोर्स में दाखिला लिया। दो सेमेस्टर में छात्राओं से 2.21 लाख रुपए लिए गए। क्लास शुरू होने के बाद छात्राओं ने कंप्यूटर की उपलब्धता, लाइब्रेरी में किताबें नहीं होने और कंप्यूटर टीचर को लेकर शिकायतें कीं। कालेज प्रबंधन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद 13 छात्राओं ने जिला उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर कर दिया।
फीस की रकम, परिवहन व्यय, मानसिक क्षतिपूर्ति तथा व्यय सहित कुल 354900 रुपए मुआवजा दिलाए जाने की मांग की। परिवाद में उन्होंने कहा कि पीजीडीसीए की 40 छात्राओं के साथ 20 छात्राओं को भी डीसीए (डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन) के लिए भी एडमिशन दिया गया। इस तरह 60 छात्रों के लिए 20 कंप्यूटर ही कालेज में उपलब्ध रहता था। इसमें सात कंप्यूटर खराब रहते थे। इसलिए महज 13 कंप्यूटर से पढ़ाई कराई गई। पढाई के लिए कालेज की लाइब्रेरी में कोर्स से संबंधित किताबें भी नहीं रहती थीं। कालेज का समय सुबह 8 से 12 बजे तक था। पहला पीरियड होने के बाद दूसरे पीरियड के लिए करीब दो घंटा इंतजार करना पड़ता था, क्योंकि दूसरे टीचर साढ़े दस बजे आते थे। सभी छात्राओं को अनावश्यक दो घंटे कालेज में बैठना पड़ता था। छात्राओं ने अध्ययन में लापरवाही और उदासीनता के अन्य कई आरोप लगाए। फोरम ने परिवाद स्वीकार करने के बाद कालेज प्रबंध से जवाब लिया। उन्होंने आरोप को अस्वीकार किया तथा कहा कि 40 में से 27 छात्राएं पास हो गईं। 13 छात्राएं रविवि की आयोजित परीक्षा में पास नहीं हो पाईं। इसलिए परिवाद दायर किया। फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि कालेज प्रबंधन ने आरोप अस्वीकार किया है, लेकिन पूर्णत: इंकार नहीं किया। ना ही अपने जवाब के समर्थन में कोई दस्तावेज ही पेश किया है। अध्ययापन को लेकर छात्राओं को सुविधाएं नहीं देना सेवा में कमी और व्यावसायिक कदाचरण है। फोरम के अध्यक्ष उत्तरा कुमार कश्यप ने परिवाद को आंशिक स्वीकार करते हुए लिहाजा छात्राओं को 185900 फीस, 39000 मानसिक क्षतिपूर्ति तथा 26000 रुपए परिवाद व्यय मिलाकर 250900 रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए।
























