सरायपाली

सरायपाली : जलाशय टूटने से पानी के लिए तरस रहे सैकड़ों किसान

सरायपाली (काकाखबरीलाल).ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों की सिंचाई के साथ-साथ अन्य कार्यों के लिए किसानों व आमजनों को पानी की समुचित व्यवस्था हेतु अनेक स्थानों पर बाँध(जलाशय) बनाये गए हैं। जहाँ भी जलाशय हैं, उसके आस पास के सैकड़ों एकड़ खेतों को सिंचाई के लिए समयानुसार पर्याप्त पानी मिल जाता है, लेकिन अंचल में भगत सरायपाली से सुखापाली के बीच स्थित जलाशय के टूट जाने के कारण क्षेत्रवासियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। बाँध में पानी नहीं रूकने के कारण गर्मी के दिनों में लोगों के निस्तारी के लिए भी पानी की समस्या उत्पन्न हो रही है, वहीं उक्त जलाशय पर आश्रित जीव-जन्तुओं को गर्मी के दिनों में काफी परेशानी हो रही है। विगत 2022-23 में उक्त बाँध के मरम्मत की स्वीकृति मिलने के बावजूद संबंधित विभाग की उदासीनता के कारण ग्रामीणों को अभी तक इसका लाभ नहीं मिल पाया है, जिससे क्षेत्र वासियों में आक्रोश देखा जा रहा है।
सुखापाली के ग्रामीण परशुराम सागर, बाबूलाल पटेल, क्षमानिधि पटेल, गुणनिधि, पदमन दीप, सुन्दरलाल सागर, शोभाराम दीप आदि ने बताया कि क्षेत्र में पानी की समस्या को देखते हुए लगभग 35-40 वर्ष पूर्व भगत सरायपाली व सुखापाली के मध्य टार बाँध (सरकारी मुड़ा) का निर्माण किया गया था। इस बाँध के बन जाने से दोनों गाँवों के सैकड़ों एकड़ खेतों की सिंचाई हो जाती थी तथा आस पास का जल स्तर भी बना रहता था। इसके अलावा ग्रामीणों की निस्तारी व मवेशियों के पेयजल निस्तारी का भी वह एक प्रमुख स्र्रोत था। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2016-17 से बाँध का एक हिस्सा टूट गया है, जिससे लगभग 20-25 फीट का स्थान खाली हो गया है। बाँध टूटने के बाद से वहाँ जल-भराव नहीं हो पा रहा है। बरसात का पानी उस खाली जगह से बाहर निकल जाता है, जिससे क्षेत्र वासियों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सिंचाई विभाग के साथ-साथ विभागीय मंत्री तक को इसकी शिकायत कर बाँध के मरम्मत की माँग की गई थी। सत्र 2022-23 में इसके मरम्मत हेतु स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण अब तक बाँध की मरम्मत नहीं हो पाई है।

जल्द मरम्मत नहीं हुआ तो हो सकता है किसानों का पलायन

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के सैकड़ों किसान खेतों की सिंचाई के लिए इसी बाँध पर निर्भर रहते हैं। बाँध के टूट जाने से खेती के लिए अब केवल बरसात का ही सहारा है। लेकिन वर्षा भी अनियमित हो गई है, जिसके कारण क्षेत्र के फसलों को काफी नुकसान पहुँच रहा है। इस बाँध के मरम्मत न होने पर सैकड़ों किसानों के सामने अत्यंत विकट स्थिति उत्पन्न हो गई है। यदि जल्द ही मरम्मत कार्य नहीं हुआ तो अनेक कृषक यहाँ से पलायन भी कर सकते हैं।

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काका खबरीलाल

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