पिथौरा :जंगल में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई

पिथौरा. समीप के बार नवापारा परियोजना मंडल के अंतर्गत परियोजना परिक्षेत्र के सिरपुर रेंज के छताल डबरा के जंगलों में राष्ट्रीयकृत वनोपज सागौन की बड़े पैमाने पर अवैध कटाई की जानकारी मिली है. वर्तमान में भी अवैध कटाई जारी है. निगम के डीएम रमन सोनवार ने कक्ष क्रमांक-127 में कूप कटाई होने, कक्ष क्रमांक-134 में अवैध कटाई की पुष्टि करते हुए कुछ सागौन लकड़ी और एक चट्टा जलाऊ जब्त करने की बात कही है. जानकारी के अनुसार वन विकास निगम के उक्त क्षेत्र में विभाग द्वारा पर्याप्त वन अमला लगाया गया है.
पर, वन विकास निगम के अधिकारी-कर्मचारी हमेशा मुख्यालय से बाहर ही रहते हैं, जिसके कारण सागौन तस्कर आसानी से तस्करी कर रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक शासकीय मूल्य के हिसाब से जिस मात्रा में सागौन के वयस्क पेड़ों की अवैध कटाई हुई है उसकी कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है. उक्त संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि बार नवापारा परियोजना मण्डल के अंतर्गत परिक्षेत्र के सिरपुर रेंज के छताल डबरा के जंगलों में राष्ट्रीयकृत वनोपज सागौन लकड़ी की अवैध कटाई बदस्तूर जारी है. कक्ष क्रमांक-127 व 134 में बेशकीमती सागौन की अवैध कटाई होना विभागीय कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है.
बड़े शहरों में हो रही सप्लाई
कक्ष क्रमांक-134 में करीब 500 पेड़ों की अवैध कटाई दिखाई दे रही है और लगातार अधिकारियों के मुख्यालय में न रहने से यह अब भी लगातार जारी है. एक अनुमान के मुताबिक क्षेत्र में प्रतिदिन कई घन मीटर सागौन की लकड़ी चारपहिया वाहन से सिरपुर, महासमुंद सहित रायपुर में सप्लाई की जा रही है. अवैध कटे सागौन की लकड़ी की गोलाई 30 सेंटीमीटर से 50 सेंटीमीटर तक है. रवान से 10 किलोमीटर व सिरपुर से 12 किलोमीटर है.
147 में कूप कटाई, 134 में अवैध कटाई : डीएम
इधर, उक्त मामले में क्षेत्र के डीएम रमन सोनवार ने इस प्रतिनिधि को बताया कि निगम के कक्ष क्रमांक-127 में वर्तमान में कूप कटाई का काम चल रहा है. इसके अलावा कक्ष क्रमांक-134 में अवैध कटाई का मामला सामने आया था. वहां कुल 7179 मीटर सागौन और एक चट्टा जलाऊ लकड़ी का पीओआर किया गया है. जिसे शीघ्र ही काष्ठगार भेजा जाएगा. बहरहाल, निगम क्षेत्र में स्वर्ण काष्ठ मानी जाने वाली सागौन और अभ्यारण्य क्षेत्रों में शेड्यूल 01 श्रेणी के वन्यप्राणियों के मारे जाने के बाद भी अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगना इस बात की पुष्टि करता है कि वनों की सुरक्षा जिन कंधों पर है, वे सुरक्षा की बजाय अन्य कार्यों में व्यस्त हैं.






















