छत्तीसगढ़

भीषण गर्मी ने बढ़ाई ड्रैगन फ्रूट की परेशानी

छत्तीसगढ़ में धमधा और कुम्हारी क्षेत्र के किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू हुई थी. आज के समय बस्तर, कोंडागांव से लेकर पूरे प्रदेश में ड्रैगनफ्रूट की खेती की जा रही है. 2006 तक ड्रैगन फ्रूट की खेती छत्तीसगढ़ में नहीं होती थी. प्रदेश में यह फल थाइलैंड व गुजरात से ही आता था. अब ड्रैगन फ्रूट देश व विदेशों में छ.ग से जा रहा है. बता दें यहां केवल एक बार लगाने पर 25 सालों तक लगातार भरपूर उत्पादन और नियमित आमदनी देता है.
जहां गर्मी का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है. इस मौसम में ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे किसानों को काफी नुकसान होता है. इस मौसम में ना सिर्फ पेड़-पौधे बल्कि फल भी झुलस जाते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कैसे करें बचाव.

ड्रैगन फ्रूट खेती के लिए सही तापमान (Dragon Fruit Farming)
ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए न्यूनतम 50 सेमी वार्षिक वर्षा वाली गर्म जलवायु की आवश्यकता होती है. और तापमान 20 से 36 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, जो सबसे अच्छा माना जाता है. पौधों की बेहतर वृद्धि और फल उत्पादन के लिए उन्हें अच्छी रोशनी और धूप वाले क्षेत्र में लगाया जाना चाहिए. इसकी खेती के लिए ज्यादा धूप उपयुक्त नहीं होती है.

अधिक गर्मी में अगर कोई नियंत्रण उपाय नहीं किया गया तो इससे फलों की वृद्धि कम हो जाएगी और पौधे सुख कर मर भी सकते हैं. पौधे के तने के पश्चिमी भाग पर धूप से जलने की तीव्रता 10−50% के बीच होती है. यहां तक कि धूप से झुलसने के बाद तना सड़न रोग बढ़ने से भी बगीचे का पूरा नुकसान हो सकता है. इसलिए, ड्रैगन फ्रूट की फसल की सुरक्षा के लिए किसानों को समय पर पता लगाने और आवश्यक सावधानियां बरतने की जरूरत है. ड्रैगन फ्रूट औषधीय गुणों से भरपूर एक बारहमासी कैक्टस है, जिसका मूल उत्पादन दक्षिणी मैक्सिको, मध्य अमेरिका और दक्षिण अमेरिका में शुरू हुआ. पिटाया, जिसे अंग्रेजी में ड्रैगन फ्रूट कहा जाता है, विभिन्न नामों से लोकप्रिय है जैसे मैक्सिको में पिटाया, मध्य और उत्तरी अमेरिका में पिटाया रोजा, थाईलैंड में पिटजाह और भारत में इस फल को इसके संस्कृत नाम कमल से कमलम कहा जाता है. इसे “21वीं सदी का चमत्कारी फल” भी कहा जाता है.

क्या है सही उपाय
एंटी-ट्रांसपिरेंट्स काओलिनाइट (50 ग्राम प्रति लीटर पानी) + नीम साबुन (4 ग्राम प्रति लीटर पानी) के साथ समुद्री घास के अर्क और ह्यूमिक एसिड (4 मिली प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें. यह सन बर्न से होने वाले नुकसान, फंगल और बैक्टीरियल संक्रमण को भी कम करता है. ड्रैगन फ्रूट के बगीचे (8-10 लीटर/पोल) की सिंचाई से फसल की धूप से जलने की चोट के प्रति सहनशीलता बढ़ जाती है.

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काका खबरीलाल

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