सरायपाली :शिक्षकों और बच्चों की इच्छा शक्ति ने चट्टान में भी बागवानी करके दिखाया

ब्लॉक में एक ऐसा भी हायर सेकंडरी स्कूल है, जहां पढ़ाई के साथ-साथ विद्यालय परिसर की साफ-सफाई व बागवानी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वह स्कूल है शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल किसड़ी, जहां बागवानी के लिए स्कूल परिसर की जमीन उपयुक्त नहीं है। बावजूद शिक्षकों और बच्चों की इच्छा शक्ति और लगन से चट्टान में भी बागवानी करके दिखाया, जो एक बहुत बड़ा चुनौती था और पूरे ब्लॉक के अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा दायक भी है।
शिक्षक और बच्चों में प्रकृति प्रेम इतना है कि उन्होंने घर के अलावा स्कूल में ही विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपण कर गार्डन का रूप दे दिया है। स्कूल पहुंचते ही ऐसा लगता है मानो किसी गार्डन में पहुंच गया हूं, ऐसे माहौल में विद्यार्थियों का पढ़ाई किस तरह से होती होगी, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है, जितने प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है। विज्ञान विषय के कक्षा 11वीं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए पुस्तक ज्ञान के अलावा प्रैक्टिकल ज्ञान काफी कारगर साबित होगा। विज्ञान के 2 शिक्षक में से दोनों पद रिक्त हैं। जिससे विद्यार्थियों की विज्ञान की पढ़ाई पूरी तरह से चरमरा गई है। शासकीय हाई सेकंडरी स्कूल किसड़ी के बागवानी प्रभारी व्याख्याता शिक्षक शंकर्षण पटेल ने बताया कि स्कूल परिसर में भारत भर के विभिन्न प्रांतों से लाकर कई ऐसे पौधों का रोपण किया गया ह,ै जो पूरे भारत में किसी एक निश्चित राज्य में ही उपलब्ध है। अन्य राज्य में पौधे देखने को नहीं मिलेंगे। शिक्षकों के द्वारा उसे हमर बगिया बागवानी का नाम दिया गया है, जहां सुगंधित फूल, औषधीय पौधे, फलदार, ड्राई फ्रूट पौधों का रोपण किया गया ह,ै जो एकाएक अपनी ओर सभी पौधे स्कूल परिसर प्रवेश करते ही आकर्षित करते हैं। पौधों को पहचानने सभी पौधों में तख्ती भी लगाई गई है, लेकिन बागवानी प्रभारी पौधों कि पत्ती देख कर ही पौधों की पहचान कर लेते हैं और उन्हें परिसर में लगे सभी पौधों की उपयोगिता की जानकारी हैं जो मौखिक तौर पर वह फूल-फल लगने का समय, लगाए गए पौधों का स्थान आदि बता देते हैं। स्कूल परिसर में लगभग 200 प्रजाति के 2000 से अधिक पौधों का रोपण किया गया है। शिक्षकों व विद्यार्थियों की मेहनत इच्छा शक्ति के सामने स्कूल परिसर का जमीन भी पौधरोपण के लिए अब कम पड़ने लगा है। 2 एकड़ में ही घेराव है, जिसमें सभी ओर पौधों का रोपण हो चुका है, जबकि स्कूल के लिए लगभग 12 एकड़ जमीन आरक्षित है।
स्कूल परिसर में 200 प्रकार के पौधे लगाए गए हैं। फूलों वह उसकी भीनी-भीनी खुशबू व कई तरह के लगाए गए पौधे को गार्डन से परिभाषित करना अतिशयोक्ति नहीं होगा। सामान्य पौधों के अलावा स्कूल परिसर में आयल पम्प, चांगरी घास जिसका उपयोग पायरिया के लिए किया जाता है। ग्राफ्टिंग युक्त गुड़हल फूल जिसमें एक पौधा में सात अलग-अलग कलर के फूल खिलते हैं, सल्फी जो बस्तर में बीयर वृक्ष के नाम से प्रसिद्ध है, जिसका ताड़ी बनाते हैं और मादक पदार्थ के रूप में इसके रस का लोग सेवन करते हैं। एक्जोरा, काजू, बादाम, चंदन, ब्रह्म यास्तिका औषधीय पौधा है, बाटर पाम, कम दिनों में फलने वाला आम, मदार सफेद, लाल, पीला खिलने वाला, रीठा, कचनार, नाशपाती, आंवला, हरिचंपा, स्टार फ्रूट लगाए गए हैं।
स्कूल परिसर की शोभा बढ़ा रहे हैं औषधीय पौधे व सुगंधित फूल
स्कूल परिसर में लगे पौधों की जानकारी देते हुए स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र भोई व बागवानी प्रभारी एसएस पटेल ने बताया कि परिसर में काली हल्दी लगाई गई, जो दिखने में काला तोड़ने में नीला रंग मोच के लिए रामबाण औषधि, लहसुन पत्रक पत्ते में लहसुन जैसे स्वाद, नील-कमल, ब्रह्म कमल, अखरोट जो केवल जम्मू कश्मीर में ही पाए जाते हैं, पत्थरचट्टा जो पत्ते से पौधों का निर्माण होता है और पथरी बीमारी के लिए उपयोग में लाया जाता है, खाने के पान में डालने वाला चेरी, सर्पगंधा जो बिच्छू के दंश मारने वाले स्थान पर लगाने से जहर खत्म हो जाता है। इंसुलिन का पौधा शुगर कंट्रोल के लिए कारगार, स्नोक प्लांट ऑक्सीजन के लिए, परिजात जो रात में खिलता है, दिन में झड़ जाता है। गिरे हुए फूल को भगवान में चढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है। इलायची फल मधु कामिनी खुशबूदार फूल, मजनु-लैला पौधा पत्ती दो कलर में, लाल चंदन जो दक्षिण भारत में पाया जाता है। तीन मुखी रुद्राक्ष, लौंग फल नहीं आएगा पत्ती से लौंग का स्वाद, विधारा पौधा फूल सूखने पर भी खुशबू आती है। इससे अगरबत्ती मनाया जाता है।
























