
महासमुंद।ज्ञात रहे सरायपाली बसना क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टर संख्या अत्याधिक संख्या में अपना व्यवसाय कर रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन पर कोई कार्यवाही नही कर रहा, जिसके झोलाछाप डॉक्टरों का व्यवसाय फलफूल रहा है और ग्रामीण अनजाने में अपने स्वास्थ्य से समझौता कर रहे है, ग्रामीण क्षेत्रो में कुछ लोग बिना डिग्री के बिना थोड़ा बहुत मेडीकल ज्ञान और इंजेक्शन लगाना सिख के निजी प्रेक्टिस करना शुरू कर देते है आमतौर पर ये प्रेक्टिशन मरीजो का ब्लड यूरिन आदि टेस्ट किये बिना ही बीमारी का अंदाजा लगा के दवाई दे देते हैं, इनके द्वारा बिना जांच पड़ताल के मरीजो को एंटीबायोटिक दवा दी जाती है मरीज भी भरोसे दे दवा लेता है झोलाछाप डाक्टर सस्ती लोकप्रियता और आमजन के बीच प्रभाव बना के रखने के लिए मरीजो पर एंटीबायोटिक का डोज बढ़ाता जाता है जिससे मरीजो को तात्कालिक फायदा तो होता है लेकिन उनके शरीर पर एंटीबायोटिक्स का प्रभाव धीरे धीरे कम होता जाता है, एंटीबायोटिक से दुष्प्रभाव भी बहुत है एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध(एएमआर) से दुनिया भर में हर साल करीब सात लाख लोगों की मौत होती रही है, इसी प्रकार झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज से रोज बड़े अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार मरीज पहुच रहे हैं ख़बरीकाका ने रायपुर के एक निजी चिकित्सालय से जानकारी ली गई तो पता चला कि गांव से इलाज कराने आने वाले मरीजो के किडनी और लिवर में एंटीबायोटिक्स का दुष्प्रभाव पाया गया है कुछ मरीजो को सामान्यतया दी जाने वाले एंटीबायोटिक्स बेअसर होते है, स्थानीय जानकारी का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को लगातार झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्यवाही करनी चाहिए जिससे क्षेत्रवासियों को इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से दो चार न होना पड़े





















