छत्तीसगढ़

शहर के युवा शिक्षक ने तोड़ा रिकार्ड पाचवीं के बाद सीधे 10वीं की परीक्षा, 17 साल में इंजीनियर बना और अब ….

दुर्ग शहर में एक ऐसा युवा शिक्षक भी है, जिसने परीक्षा और पढ़ाई के सारे रिकार्ड तोड़ दिए। गिरीश पवार पिता राजेश जब कक्षा 5वीं में था तब उसने कक्षा 10 वीं बोर्ड की परीक्षा दिलाई और अच्छे अंकों से पास किया था। इसके बाद गणित विषय लेकर कक्षा 11वीं और 12 वीं की पढ़ाई की। महज 14 साल की उम्र में गिरीश ने 12 पास करने के बाद प्री इंजीनियरिंग टेस्ट(पीईटी) दिया। इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और महज साढ़े 17 साल की उम्र में उसने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी कर ली। संभवत: गिरीश प्रदेश का पहला ऐसा छात्र है, जिसने यह रिकार्ड बनाया है। 14 साल की उम्र में जब बच्चे कक्षा 9वीं 10वीं में होते हैं। तब गिरीश ने पीईपी उत्तीर्ण कर ली थी। इसके बाद आज तक कोई ऐसा छात्र नहीं हुआ। आदित्य नगर निवासी गिरीश पवार आज 20 साल के हैं और अपने ही रिकार्ड को तोड़ने के लिए कई बच्चों को पढ़ा रहे हैं। उन्हें अपने जैसा काबिल बनाने के लिए तरास रहे हैं। शुक्रवार को गिरीश से हरिभूमि की विशेष मुलाकात हुई। जिसमें गिरीश ने कहा कि वे शिक्षा व्यवस्था को बदलना चाहते हैं। उम्र, कक्षा और सेलेबस रूपी बंधन से मुक्त कर जिन बच्चों मेें प्रोटेशियल है। उन्हें योग्यता के अनुसार कक्षा का निर्धारण करने की नई नीति शुरूआत करना चाहते हैं। वे एक शिक्षक है और एक बेहतर शिक्षक बनकर बच्चों का भविष्य संवारना ही उनके जीवन का मूल उद्देश्य है। इसलिए वे अब बीएड की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे गिरीश ने बताया कि उनमें जन्मजात कोई विशेष गुण नहीं था। सभी बच्चे अर्जुन और एकलव्य हैं। सब में विशेष गुण होता है। बस जरूरत है तो उसे सही समय पर एक्टीवेट करने की। वैसा ही उनके मातापिता और उनके शिक्षक पवन सिन्हा ने किया। अब वे खुद बच्चों को पढ़ाकर उन्हें होनहार और इस काबिल बना रहे हैं कि वे उनका भी रिकार्ड तोड़ दें। बोर्ड ने माना था विशेष प्रकरण माध्यमिक शिक्षा मंडल बोर्ड ने गिरीश को 10वीं बोर्ड परीक्षा देने के लिए विशेष परमिशन दिया है। गिरीश कक्षा 5 वीं में थे, तब उनके माता-पिता और शिक्षक ने उसे 10 वीं की परीक्षा के लिए तैयार किया। जब बोर्ड परीक्षा के लिए फार्म भरा तो उसका फार्म ही जमा नहीं हुआ। इसके बाद उसके पिता उसे लेकर बोर्ड गए और अनुमति मांगी। अचंभित बोर्ड ने परीक्षा ली और देखा कि सच में गिरीश बोर्ड परीक्षा देने के काबिल है या नहीं। परीक्षा में गिरीश पास हुआ और फिर बोर्ड ने विशेष अनुमति दी। इसके बाद आजतक बोर्ड ने किसी को परमिशन नहीं दिया है।

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काका खबरीलाल

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