कोरोना में बदला लोगों के जीने का तरीका: सामूहिक आयोजन अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ताकि बिना डर के शामिल हो सकें ज्यादा से ज्यादा लोग

रायपुर (काकाखबरीलाल). कोरोनाकाल में लोगों के जीने का ताैर तरीका बदल गया है। सामूहिक आयोजन भी अब इससे अछूते नहीं हैं। समाजों में सबसे बड़ी डिजिटल क्रांति संभवत: लॉकडाउन के दौरान ही आई है। मार्च के बाद 6 माह तक ज्यादातर सामाजिक कार्यक्रम हुए ही नहीं। अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जैसे तैसे कार्यक्रमों की अनुमति मिली भी तो सावधानी से जुड़े कई नियमों के साथ। बड़े समूह में इन नियमों का शत प्रतिशत पालन कराना संभव नहीं, ऐसे अब समाजों का जोर डिजिटल समारोह कराने पर है, ताकि इसमें ज्यादा से ज्यादा लोग भी शामिल हो सकें और संक्रमण फैलने का डर भी न रहे। इसी कड़ी में 27
दिसंबर को वर्चुअल कुर्मी संझा का आयोजन किया गया है। इसका प्रसारण डिजिटल स्क्रीन पर किया जाएगा। फेसबुक, यू ट्यूब के जरिए लोग कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे। कुर्मी समाज का यह सबसे बड़ा सालाना जलसा है। हर साल इसमें हजारों लोग शिरकत करते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा आयोजन संभव नहीं। लिहाजा, समाज ने वर्चुअल कुर्मी संझा आयोजित करने का फैसला लिया है। इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नहीं होंगे। कुर्मी संझा के संयोजक डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर ने बताया, 27
दिसंबर को समाज के मुख्यालय बैस भवन में ज्वलंत और सम सामयिक मुद्दों पर गोष्ठी होगी जिसमें समाज के बुद्धिजीवी अपनी राय रखेंगे। प्रदेशभर में रहने वाले समाजजन फेसबुक और यूट्यूब के जरिए कार्यक्रम से जुड़ेंगे। इस मौके पर मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामकुमार सिरमौर द्वारा युवक-युवती मिलन पुस्तिका के 17वें अंक का विमोचन किया जाएगा।
हरदीहा साहू समाज ने कोरोनाकाल में लोगों तक घर बैठे रिश्ता पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। समाज के युवक-युवतियों की ई-परिचय पुस्तिका बनाई जा रही है। इसमें प्रदेशभर के साहू युवाओं की जानकारी तस्वीर के साथ होगी। समाज के अध्यक्ष नंदे साहू ने बताया, पिछले दिनों समाज का परिचय सम्मेलन आयोजित किया गया था। परिचय सम्मेलन के लिए इस बार महज 150 प्रतिभागियों ने आवेदन दिया था। पिछले साल 400 प्रतिभागी पहुंचे थे। इनमें से भी केवल 50 प्रतिभागी ही मंच तक पहुंचे। कोरोना के
भय के चलते लोग कार्यक्रम में शामिल होने से झिझक रहे हैं इसलिए हमने उन तक घर बैठे रिश्ता पहुंचाने का फैसला लिया है। ई-परिचय पुस्तिका से रिश्ता तलाशने में सहूलियत होगी।
चातुर्मास खत्म हो चुका है, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते साध्वियों ने विहार शुरू नहीं किया है। यानी कुछ और समय तक साध्वियां शहर में रहकर जैन समाज के लोगों का मार्गदर्शन करेंगी। वह भी कोरोना नियमों के दायरे में रहकर। जैन श्वेतांबर चातुर्मास समिति के प्रचार प्रसार प्रभारी तरूण कोचर ने बताया, रोज दोपहर 2 से शाम 4 बजे तक धर्मचर्चा होती है जिसका फेसबुक पर प्रसारण किया जा रहा
है। कोरोना संक्रमण के चलते फिलहाल ज्यादा लोगों को साध्वियों से मिलने की अनुमति नहीं है। साध्वियों से सवाल पूछने के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था की गई है। लोग वॉट्सएप में मोबाइल नंबर 9329017000 पर अपने सवाल पूछ सकते हैं। उन्होंने बताया कि चातुर्मास के दौरान भी समाज में 31 दिवसीय इकतीसा पाठ का आयोजन ऑनलाइन किया था। इसमें न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि भारत समेत दुनियाभर के लाेगों ने हिस्सा लिया था। प्रतिदिन 20 हजार लोग इस महानुष्ठान में शामिल हुए और विश्व को कोराेना से मुक्ति दिलाने की कामना की। इसके अलावा प्रतिदिन साध्वियों के प्रवचन भी फेसबुक पर होते थे।

























