
खतरों के बीच टहलने की मजबूरी
रिपोर्ट- नन्दकिशोर अग्रवाल
पिथौरा। नगर पंचायत द्वारा संचालित शहर का एक मात्र गार्डन इन दिनों देख-रेख के अभाव के कारण घासफूस से अटा पड़ा है। यहां आने वाले लोगों को अब जान-माल का खतरा बढ़ गया है। समय-समय पर यहां विषैले सर्प भी देखा गया है, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन इस पर कोई पहल नहीं कर रहा है। छत्तीसगढ़ शासन ने नगरीय प्रशासन मंत्रालय के माध्यम से सभी नगरीय निकायों को भारी भरकम राशि देकर गार्डन निर्माण करवाया है, लेकिन पिथौरा नगर में गार्डन की उचित देख-रेख नहीं हो पा रही है।
शहर के मध्य में स्थित इस गार्डन में सुबह-शाम शहरवासियों का आगमन होता है। दिन भर के भाग दौड़ के बाद शाम ढलते ही यहां गृहिणी, बच्चे वृद्ध सभी आयु वर्ग के लोग समय व्यतीत करने पहुंचते हैं। इतना ही नहीं बच्चे भी यहां आकर टहलने व झूलों का आनंद लेते हैं। सुबह-शाम टहलने की दिनचर्या वाले लोगों को भी पैदल चलने के लिए यहां आना पड़ता है। कुल मिलाकर देखें तो शहरवासियों के लिए यह गार्डन अत्यंत आवश्यक है।
लाइट का भी अभावयहां रोशनी के लिए लगे खंभों में बल्व खराब होने के कारण अंधेरा रहता है। शाम करीब साढ़े 6 बजे से साढ़े 8 बजे तक इसे खोला जाता है, लेकिन बल्व खराब होने के कारण अंधेरा रहता है। लेकिन महीनों से बंद पड़े इन बल्वों को बदलने की आवश्यकता नहीं समझी जा रही है। लोग अंधेरे में खतरों के बीच यहां टहलने हैं। जहरीले जीव-जंतु से बचाव के लिए किसी तरह के कीटनाशक का छिड़काव नहीं किया जा रहा है।
महापुरुष के प्रतिमा के आसपास भी घासफूस
यहां पर लगे महापुरुष के प्रतिमा के आसपास भी घासफूस का अंबार है। इस स्थान को भी साफ-सफाई तक नहीं कराया गया है। कम से कम इस स्थान को तो साफ-सुथरा रखा जाना चाहिए। लेकिन इस पर भी ध्यान नहीं दिया गया और एकमात्र चौकीदार की ड्यूटी लगाकर गार्डन को अपने हाल पर छोड़ दिया गया है।
घासफूस से गार्डन के भरे होने पर कड़ी नाराजगी स्थानीय नागरिकों ने जाहिर करते हुए कहा कि इसकी देख-रेख नियमित होनी चाहिए। दो कर्मचारियों की नियमित ड्यूटी लगानी चाहिए। ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके। इस मामले में सीएमओ का ध्यानाकर्षण कराने के बाद भी गंभीरता से नहीं लेना प्रशासनिक व्यवस्था में कमी है। पूरे शहरवासियों को शासन की इस योजना का लाभ मिलना चाहिए।

























