
गोवर्धन कैवर्त की ख़ास रिपोर्ट
बिलासपुर:- शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता लाने और शिक्षकों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से प्रदेश के कवर्धा बेमेतरा दुर्ग, रायपुर, धमतरी समेत राजनांदगांव में बायोमेट्रिक मशीन का प्रयोग शुरू किया गया है वहां की तस्वीर देखकर आप भी हंसे बिना नहीं रह पाएंगे। दरअसल नेटवर्क ना मिलने की समस्या के चलते शिक्षकों को नेटवर्क ढूंढने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है । कोई शिक्षक बीच मैदान में हाथ में बायोमेट्रिक मशीन पकड़कर नेटवर्क ढूंढने को विवश है तो किसी ने खेल के लिए प्रयोग की जाने वाली सीढ़ी को ही नेटवर्क ढूंढने का अपना सहारा बना लिया है और इसके बाद भी नेटवर्क नहीं मिलने पर सिवाय योजना को कोसने के कोई विकल्प नही रह गया है। दरअसल शिक्षकों की उपस्थिति इन जिलों में इन मशीनों के बताएं आंकड़े के आधार पर ही मानी जाएगी इसलिए इस मशीन में सही समय पर शिक्षकों के आने जाने का समय अंकित होना अनिवार्य है लेकिन नेटवर्क ना होने की स्थिति में शिक्षक परेशान हो जा रहे हैं और फिर वे किसी भी तरीके से अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहते हैं यही कारण है कि कुछ जगहों से ऐसी ऐसी तस्वीरें सामने निकल कर आ रही है की देखने वाला भी हतप्रभ हो जाए । चूंकि मामला सीधे वेतन से जुड़ा है अतः शिक्षक भी नहीं चाहते कि समय पर आने के बावजूद उनकी एंट्री ना हो इसीलिए वह भी अपनी तरफ से तमाम प्रयास नेटवर्क पाने के करते रहते हैं । प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में यह समस्याएं रोज देखने को मिल रही है लेकिन स्थानीय अधिकारियों का कहना है की इस विषय मे वह भी कुछ नहीं कर सकते ।






















