देश-दुनिया

वाह रे पानी बादर
अइसन दिन म आए काबर – मनोज प्रधान

काकाखबरीलाल/कविताओं का संग्रह

वाह रे पानी बादर
अइसन दिन म आए काबर
साल कथरी म रतिहा बितै
अब सांटे ल होगें चादर

वाह रे पानी बादर
अइसन दिन म आए काबर

किसान मन के धान भिंगत हे
मंडी लेगे बर दिन गिंनत हे
बियारा ले घर डोहरई म
थकगे जांगर
वाह रे पानी बादर
अइसन दिन म आए काबर

जाढ के मारे नौहइया कांपे
बिगन नहाए रंधनी कुरिया झांके
चूर गे का रोटी अंगाकर

वाह रे पानी बादर
अइसन दिन म आए काबर मनोज प्रधान

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