सरायपाली

सरायपाली :नहर का जीर्णोद्धार न होने के कारण जलाशय का पानी खेतों तक नहीं पहुंच रहा

शहर में स्थित महल जलाशय के नहर का जीर्णोद्धार न होने के कारण जलाशय का पानी खेतों तक नहीं पहुंच रहा है और किसानों को जलाशय के पानी का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे किसान चिंतित हैं और स्वयं खेतों तक पानी ले जाने नहर की साफ-सफाई में लग गए हैं।

जबकि, जल संसाधन विभाग को नहर मरम्मत के नाम पर लाखों रुपए राशि भी आवंटित होती है। बावजूद नहर की मरम्मत न करवाना समझ से परे है। शहर के अंबेडकर नगर के किसान हेमलाल, अमृत रात्रे, दुर्योधन बारी, संजय, सुरेश प्रधान, प्रमोद कुमार, रामेश्वर, निरंजन, संकीर्तन खुंटे, मकरध्वज साहू आदि लोगों ने बताया कि महल जलाशय से वार्ड-1, 5 बालसी के कई का खेत सिंचित होता है, लेकिन प्रतिवर्ष नहर की मरम्मत ना होने के कारण कहीं नहर उथला तो कहीं गहरा, कहीं मेड़ फूट जाने के कारण नहर का पानी जलाशय के समीप कुछ खेतों तक सिमट कर रह जाता है। इससे दूर के खेतों को नहर के पानी का लाभ नहीं मिल रहा है। जबकि, जलाशय के पानी से 100 एकड़ से अधिक खेतों में पानी सिंचित होता है। आधा बारिश निकल जाने के बाद भी जल संसाधन विभाग की ओर से इस वर्ष नहर मरम्मत न करने व खेतों में पानी सूख जाने से दरारें पड़नी शुरू हो गई है। किसान अपने खेतों तक पानी पहुंचाने स्वयं श्रमदान कर नहर की सफाई करने में लगे हुए हैं। इस संबंध में जल संसाधन विभाग एसडीओ सदानंद चौधरी से दूरभाष से संपर्क किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

नहर मरम्मत में लापरवाही बरतने का आरोप

किसानों ने बताया कि विगत वर्ष मनरेगा के तहत 1 लाख 47 रुपए में नहर के जीर्णोद्धार के लिए राशि स्वीकृत हुई थी, लेकिन नहर मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। प्रतिवर्ष तेज बारिश, नहर के समीप कई खेतों को तैयार करने, धान काटने व धान ले जाने ट्रैक्टर, हार्वेस्टर का उपयोग होता है। कई स्थानों की नहर की मेड़ कट जाती है। इसे प्रतिवर्ष सुधार की आवश्यकता होती है। जल संसाधन विभाग को प्रतिवर्ष शासन से जीर्णोद्धार के नाम पर राशि स्वीकृत होती है, लेकिन विभाग द्वारा नहर मरम्मत में ध्यान ना दिए जाने और जलाशय के पानी का समुचित उपयोग करने पहल न करने से मात्र एक चौथाई हिस्सा में ही जलाशय का पानी व्यर्थ बहकर रह जाता है। जबकि दूसरी ओर कई खेत की फसल पानी के अभाव में मरने की कगार पर है, जिसे बचाने किसान नहर के पानी को खेतों तक पहुंचाने स्वयं आगे आने लगे हैं। इस वर्ष तो अभी तक न तो नहर की मरम्मत हो पाई है और ना ही जलाशय के पानी को खेतों तक पहुंचाने विभाग द्वारा ध्यान दिया जा रहा है। शहर के नहर का ये हाल है तो अंचल के अन्य जलाशयों के नहरों की क्या दशा होगी अंदाजा लगाया जा सकता है

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काका खबरीलाल

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