मनोहारी पर्यटन स्थल के रूप में होगा विकसित ‘बुका जल विहार’ क्षेत्र

(कोरबा काकाखबरीलाल).
जिला प्रषासन द्वारा पर्यटन मण्डल के सहयोग से बुका जलविहार क्षेत्र को मनोहारी पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की कवायद शुरू हो गई है। कलेक्टर श्रीमती किरण कौषल ने आज जिला स्तरीय विभिन्न अधिकारियों के साथ अलसुबह बुका जलविहार क्षेत्र का निरीक्षण किया और इस जगह पर पर्यटकों के लिये विभिन्न सुविधायें विकसित करने तथा क्षेत्र का सौंदर्यीकरण करने की सम्भावनायें तलाषी। श्रीमती कौषल ने छत्तीसगढ़ का मॉरिषस कहे जाने वाले इस जलाषय को पर्यटकों के लिये आकर्षक और सुविधा सम्पन्न बनाने पर विषेष जोर दिया तथा आगामी तीन दिनांे में विस्तृत कार्य-योजना प्रस्तुत करने के निर्देष अधिकारियों को मौके पर ही दिये। इस दौरान अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी श्री संजय अग्रवाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एस. जयवर्धन सहित कटघोरा एवं कोरबा वनमण्डल के वनमण्डलाधिकारी, पीडब्ल्यूडी, वन-विभाग और जिला पंचायत के अधिकारी भी मौजूद रहे।
कलेक्टर ने अपने भ्रमण के दौरान मुख्य मार्ग से जलाषय तक पहुॅंचने के लिये बने पहुॅंच मार्ग का भी गम्भीरता से अवलोकन किया तथा जलाषय तक सरल एवं सुलभ पहुॅंच के लिये किनारे-किनारे झाड़ियों को हटाकर नया पैदल मार्ग बनाने के लिये कार्य-योजना प्रस्तुत करने के निर्देष दिये। उन्होंने इस नई बनने वाली सड़क पर जलाषय तट की ओर मजबूत रैलिंग लगाने और इस पैदल मार्ग पर सौंदर्यीकरण की भी पूरी योजना बनाने के निर्देष दिये। कलेक्टर ने जलाषय के पूरे परिसर में साफ-सफाई भी कराने के निर्देष दिये। श्रीमती कौषल ने बुका जल विहार परिसर की सड़कों के किनारे उग गई झाड़ियों और पर्यटकों द्वारा फेंके गये कचरे आदि की पूरी सफाई कराने के निर्देष अधिकारियों को दिये। श्रीमती कौषल ने परिसर में अच्छी फुलवारी युक्त बगीचे भी विकसित करने की योजना पर अधिकारियों से विचार-विमर्ष किया।
300 से अधिक स्थानीय बेरोजगारों को मिलेगा रोजगार- बुका जलविहार क्षेत्र के विकसित पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित हो जाने पर मड़ई और बुका ग्राम पंचायतों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्र के लगभग तीन सौ से अधिक स्थानीय युवाआंे और महिलाओं को विभिन्न रोजगार के अवसर मिलेंगे। कलेक्टर श्रीमती कौषल ने आज बुका जलविहार परिसर में वर्तमान में काम करने वाली महिलाओं और स्व-सहायता समूहांे की दीदियों से मुलाकात की और बुका को आदर्ष पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना की जानकारी दी। कलेक्टर ने स्थानीय ग्रामीणों और महिलाओं को इस पर्यटन स्थल पर रोजगार की सम्भावनाओं से अवगत कराया और उन्हें विभिन्न कामों के लिये ट्रेनिंग दिलाने का भी आष्वासन दिया। कलेक्टर ने स्थानीय निवासियों को बताया कि बुका के एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने पर साफ-सफाई से लेकर खाने-पीने की स्वादिष्ट चीजों, वाहन पार्किंग से लेकर वाहन मरम्मत और यहॉं के कॉटेज में रूकने वाले पर्यटकों के लिये आतिथ्य सत्कार जैसे रोजगार के अवसर लोगों को मिलेंगे। बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिये खाने-पीने-रूकने के साथ-साथ जलविहार दर्षन की व्यवस्था से लोगों को बारह-मासी काम मिलेगा। जिससे क्षेत्र के लोगों की माली हालत सुधरेगी। कलेक्टर ने बताया कि बुका में आने वाले लोगों के वाहनों की पार्किंग के लिये एक सुसज्जित सर्वसुविधायुक्त स्थान तय किया जायेगा, जहॉं वाहनों की सुरक्षा के लिये स्थानीय युवाओं को काम पर रखा जायेगा। इसके साथ ही क्षेत्र में खाने-पीने की दुकानें, चौपाटीनुमा एरिया भी विकसित होगा जहॉं इटली-दोसा-चाउमिन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के पारम्परिक स्वादिष्ट चीला-फरहा जैसे व्यंजन भी पर्यटकों को खाने के लिये मिल सकेंगे। इन दुकानों का संचालन भी स्थानीय महिलाओं एवं युवाओं द्वारा ही किया जायेगा। कलेक्टर ने बताया कि पार्किंग स्थल से बुका जलाषक तक आने के लिये चार पहिया वाहनों का उपयोग प्रतिबंधित किये जाने की योजना है। पर्यटक पार्किंग स्थल से ई-रिक्षा द्वारा जलाषय तक पहुॅंच सकेंगे और जल विहार परिसर में आने-जाने के लिये ई-रिक्षा का ही सषुल्क उपयोग किया जायेगा। उन्होंने बताया कि यह ई-रिक्षा भी स्थानीय लोगों द्वारा ही संचालित होंगे ताकि उन्हें बुका में रोजगार मिल सके।
कलेक्टर ने यह भी बताया कि बुका जलविहार परिसर में नौका विहार के लिये पर्यटन मण्डल द्वारा बड़े क्रुज और मोटर से चलने वाले बड़े नाव भी संचालित करने की योजना है। स्थानीय युवाओं को ही इसके संचालन का प्रषिक्षण और जिम्मेदारी दी जायेगी ताकि लोगों को स्थानीय स्तर पर काम मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ युवाओं को पर्यटक गाईड के रूप में प्रषिक्षित किया जायेगा तो कुछ को सुरक्षा की दृष्टि से सेक्युरिटी गार्ड और गोताखोरी का भी प्रषिक्षण दिलाया जायेगा। प्रषिक्षित युवाओं को बुका जल विहार परिसर में ही रोजगार से जोड़ा जायेगा। कलेक्टर ने बुका के स्थानीय युवाओं को यहॉ बने कॉटेजों में आने वाले पर्यटकों के आतिथ्य सत्कार के लिये भी प्रषिक्षित किया जायेगा। पर्यटकों से किये जाने वाले व्यवहार, भाषा-बोली के साथ-साथ अन्य गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दिलाकर स्थानीय युवाओं को यहॉं हॉस्पीटलिटी के काम में संलग्न किया जायेगा। कलेक्टर ने बुका में आने वाले पर्यटकों को अच्छा और अलग-अलग वैरायटी का खाना उपलब्ध कराने के लिये भी स्थानीय युवाओं को ही प्रषिक्षण दिलाने की योजना बतायी। उन्होंने छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के साथ-साथ अन्य प्रकार के व्यंजनों को बनाने का प्रषिक्षण भी दिलाने के लिये स्थानीय युवाओं का चयन करने के निर्देष अधिकारियों को दिये। इसके साथ ही कलेक्टर ने आसपास के क्षेत्रांे में होने वाले वन उत्पादों, हस्तषिल्प आदि पर भी फोकस कर इनके निर्माण एवं पर्यटकों को बेचने की व्यवस्था की भी बात कही। कलेक्टर ने आगामी तीन दिनों में बुका-मड़ई सहित आसपास की ग्राम पंचायतांे में सर्वे कर इन सभी विभिन्न सम्भावित कामों के लिये इच्छुक एवं योग्य स्थानीय युवाओं तथा महिलाओं का सर्वे कर कामवार सूची तैयार करने के निर्देष जनपद पंचायत एवं राष्ट्रीय आजीविका मिषन के उपस्थित अधिकारियों को दिये। सूची अनुसार इच्छुक स्थानीय युवाओं एवं महिलाओं में से ही योग्य प्रतिभागियों को इन विभिन्न कार्यों के लिये प्रषिक्षण दिलाया जायेगा और उन्हें बुका जलविहार पर्यटन स्थल पर नियोजित किया जायेगा।
अभी तीस परिवारों को मिलता है रोजगार- अभी बुका जल विहार पर्यटन स्थल वन प्रबंधन समिति बुका और वन समिति कठमोंगरा के द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है। बुका जल विहार से दोनों समितियां औसतन 15 लाख रूपए के वार्षिक टर्नओव्हर का व्यापार करती हैं। इसके साथ ही बुका और कठमोंगरा समितियों के 30 परिवारों को बुका जल विहार से वर्ष भर का नियमित रोजगार भी मिलता है। यह जल विहार हसदेव बांध के उलट क्षेत्र में हुए जल भराव में किया गया है। वर्ष 1980-81 में यहां से बुका गांव के 20 परिवारों को पहाड के ऊपर विस्थापित किया गया है। वही 20 परिवारों के सदस्य और कठमोंगरा समिति मिलकर इसका संचालन करते हैं।
बुका जल विहार में नवम्बर, दिसम्बर, जनवरी और फरवरी में बाहर से भी पर्यटक आने लगे हैं। यहां नौका विहार के लिए आए पर्यटकों के लिए रूकने और भोजन की भी व्यवस्था होती है। रूकने के लिए यहां दो बिस्तरीय ग्लास हाऊस, मड हाऊस तथा हसदेव हाऊस बनाए गए हैं। यहां समिति द्वारा रूकने वाले और आने वाले पर्यटकों के लिए स्वादिष्ट भोजन की भी व्यवस्था की जाती है। यहां नौका विहार के लिए 15 सीटर और 10 सीटर की दो मोटरबोट है। समिति के अध्यक्ष बताते हैं कि वर्ष 2018-19 में यहां से समिति ने 15 लाख 92 हजार रूपए का व्यापार किया गया था। इसमें ग्लास हाऊस, मड हाऊस, हसदेव हाऊस और टेंट निंच के किराए से 9 लाख 44 हजार 600 रूपए की आय सर्वाधिक रही। शेष 5 लाख 97 हजार 400 रूपयों की आय नौका विहार और कैंटीन से हुई है। बैरियर से भी 92 हजार रूपए इसी में शामिल हैं। इस तरह यहां समिति 15 लाख 92 हजार रूपए का व्यापार करती हैं। इसी आय से समिति, 30 सदस्यों को 4000 रूपए मासिक वेतन देती है। साथ ही नौका विहार के मेंटनेंस का खर्च भी इसी आय से होता है। गत वर्ष 2018-19 में समिति ने वर्ष भर में कुल 10 लाख 93 हजार 600 रूपए खर्च भी किए हैं।























