महासुमंदबसना

आदिवासी युवाओं ने बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव दिवस एवं ईशर गउरा बिहाव धूमधाम से मनाया

 

 

“संस्कृति मन और आत्मा का विस्तार है,
हमारा सुंदरता से ज्यादा अपनी संस्कृति पर ध्यान है।
जहां जहां जिक्र हीरों का होगा,
वहां नाम देश के आदिवासी वीरों का होगा।”

इन्हीं पंक्तियों के साथ दिनांक 15 नवंबर दिन शुक्रवार को फुलझर अंचल में स्थित बसना ब्लॉक में भगवान बिरसा मुंडा चौक पर आदिवासी युवा प्रभाग सरायपाली बसना के युवाओं ने भगवान बिरसा मुंडा जी के जयंती और जनजातीय गौरव दिवस को बड़े धूम धाम के साथ मनाया । भगवान बिरसा मुंडा जी आदिवासी समाज के महापुरषों में से एक है जिन्होंने गरीब तथा आदिवासियों के ऊपर हो रहे अंग्रेजो के दमनात्मक शासन के खिलाफ आवाज बुलंद की और धनुष तीर के जरिए ही अंग्रेजी सेना के साथ युद्ध किया । उन्ही भगवान बिरसा मुंडा जी के साहस, शौर्य, पराक्रम और देश को आजाद कराने में दिए गए बलिदान को स्मरण करते हुए पूरे आदिवासी रीति रिवाज के साथ पूजा अर्चना किया गया उसके उपरांत सभी युवाओं ने अपने पारंपरिक परिधान के साथ भव्य बाइक रैली निकाली जो पूरे बसना नगर में भ्रमण करते हुए गोंड राजाओं के गढ़ किला गढ़फुलझर पहुंची जहां ईशर गउरा विवाह कार्यक्रम आयोजित था जिसमे ईशर राजा के बारात में पूरे युवाओं ने बढ़ चढ़ कर उत्साह के साथ भाग लिया । बारात गढ़फुलझर के बाजार पड़ाव से निकलकर पुरे गांव में घूमते हुए गढ़ किला मैदान में नव निर्मित बुढ़ादेव देवालय पहुंची जहां गोंड समाज में होने वाली सभी रीति रिवाजों के साथ संपन्न हुआ जिसमे गोंड समाज के अतिरिक्त सर्व आदिवासी समाज के 10 हजार से अधिक संख्या में लोगों ने अपनी भागीदारी दिया। अब आदिवासी समाज अपने संस्कृति, रीति रिवाजों, अपने धरोहरों को जानने समझने लगी है और उसे संभाल के रखने में लगी हुई है।

ईशर गउरा विवाह हुआ सम्पन्न

जिसमे धमधागढ़ राज्य के राजा ईशर राजा मरकाम गोत्र जो सांड पर सवार होते हैं और लांजीगढ़ राज्य की बेटी गउरा दाई नेताम गोत्र जो कछुआ पर सवार होती है, गोंडी धर्म गुरु पहान्दी पारी कुपार लिंगों द्वारा बनाए गए गोत्र व्यवस्था को लागू रखते हुए अलग अलग गोत्र में शादी व्यवस्था को निभाते हुए जिस प्रकार गोंड समाज में अपने बेटा, बेटी का विवाह किया जाता है उसी प्रकार ही ईशर गउरा विवाह (देव विवाह) किया जाता है जिसमे विवाह के पूरे रीति रिवाजों को किया जाता है फिर पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ गंगा स्नान के लिए लिया जाता है जिसमे आदिवासी युवा प्रभाग सरायपाली बसना के सभी युवाओं ने बड़े उत्साह के साथ इस विवाह में अपनी भागीदारी दिखाई और अपनी संस्कृति को आगे बढ़ाने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया।

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