शादी हो या जन्मोत्सव, बचा भोजन अब नहीं होगा व्यर्थ, जरूरतमंदों को मिलेगा

सामाजिक दायित्वों और सरोकार की दिशा में अनेक संस्थाओं ने एक अ‘छी पहल की है। ऐसे लोगों की चिंता को अपने सरोकार में शामिल कर रखा है, जिनके सामने दो जून की रोटी की बड़ी समस्या है। यह तक किया है कि घर, परिवार हो या समाज में कोई भी उत्सव कार्यक्रम, जहां सैकड़ों लोगों को भोजन पर आमंत्रित किया जाता है, वहां भोजन यदि बच जाता है तो यूं ही व्यर्थ नहीं फेंकेंगे, बल्कि जरूरतमंदों के बीच पहुंचाएंगे।
दरअसल, शादी समारोह, धार्मिक आयोजन, जन्मदिन जैसे उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे कार्यक्रमों में कई बार ऐसा होता है कि कुछ भोजन बच जाता है। उस भोजन को किसी भी संस्था जो भोजन वितरण जैसे कामों में लगी हुई हैं, उन्हें बुलाकर जरूरतमंदों तक पहुंचाना तय किया है।
अवाम-ए-हिंद ने भोजन सेवा जो शुरू की, फिर कभी बंद नहीं हुई
अवाम-ए-हिंद संस्था ने जब कोरोनाकाल का संकट गहराया तो भोजन सेवा शुरू किया। फिर उस सेवा को जरूरतमंदों के लिए निरंतर जारी रखा। सर्दी हो बरसात, कोई तीज-त्योहार, उत्सव का अवसर रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और आंबेडकर, डीकेएस हास्पिटल जैसी जगहों पर भोजन मुहैया कराने को सुपोषण अभियान का रूप दिया। संस्था के संस्थापक मोहम्मद स’जाद खान ने बताया कि आज भोजन सेवा को 402 दिन पूरे हो चुके हैं। जिसमें सदस्यों का भी पूरा सहयोग मिला है।
माहेश्वरी समाज ने दो साल पहले तय किया
छत्तीसगढ़ प्रादेशिक माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष रामरतन मूंदड़ा बताते हैं कि उनका समाज हमेशा धार्मिक और सामाजिक सरोकारों में अग्रणी रहा है। दो साल पहले अखिल भारतीय महासभा का सम्मेलन जोधपुर राजस्थान में हुआ था, जिसमें अनेक प्रांतों से समाज के पदाधिकारी और सदस्य पहुंचे हुए थे। उसमें तय किया कि उतना ही लें थाली में, व्यर्थ न जाए नाली में। इस सूत्र वाक्य को अपनाया है। तब से शादी समारोह, जन्मदिन, धार्मिक कार्यक्रमों जैसे अवसर पर भोजन बचने पर फेंकते नहीं, बल्कि जरूरतमंदों में बांटने का निश्चय किया है।
अन्न का अपमान, भगवान का अपमान करने जैसा
छत्तीसगढ़ प्रांतीय अग्रवाल संगठन के चेयरमैन अशोक अग्रवाल बताते हैं कि सामाजिक समारोह में बचा हुआ भोजन फेंकने पर पूरी तरह से रोक लगाया हुआ है। सामाजिक बैठकों और सम्मेलन में इस बात पर जोर देते हैं कि अन्न का अपमान, भगवान का अपमान करना जैसा है, इसलिए उसका सदुपयोग अधिक से अधिक जरूरतमंदों के बीच करना तय किए हैं। इस उद्देश्य से अग्रसेन रसोई रामसागरपारा में खोलकर कोरोना के संकटकाल में लोगों को मदद करने का काम किया।
वैश्य महासम्मेलन में पूरी तरह से लागू
अंतर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के प्रदेश महामंत्री राजकुमार राठी ने बताया कि उनके इस संगठन में कारोबार क्षेत्र से जुड़े हर जाति और धर्म के लोग शामिल हैं। सभी ने मिलकर मदद और सहयोग की भावना की दिशा में अधिक से अधिक काम करना तय किया है। उत्सव के किसी भी कार्यक्रम में बचा हुआ भोजन जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं। कई बार बढ़ते कदम संस्था को उपलब्ध कराते हैं, जिससे कि उसका वितरण जरूरतमंदों, बस्तियों में कराया जा सके।
तृप्तांजलि सेवा में कई लोग जुड़े
चरामेति संस्था ने एम्स के सामने तृप्तांजलि की शुरुआत की तो उसमें कई लोग जुड़ते चले गए। राजेंद्र ओझा बताते हैं कि एम्स में अनेक जगहों से लोग आते हैं। यह सोच कर अस्पताल के ठीक सामने एक मंदिर परिसर में भोजन वितरित की सेवा सप्ताह में एक दिन आज तक चल रही है।
























