सरायपाली:कठिन परिस्थितियों में हासिल की एमबीबीएस में सफलता, उजल बाघ ने बढ़ाया समाज का मान

सरायपाली। मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्राम अर्जुण्डा के उजल बाघ ने एमबीबीएस की पढ़ाई में प्रवेश लेकर मगधा यादव समाज एवं विकासखंड सरायपाली का गौरव बढ़ाया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले उजल वर्तमान में चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, दुर्ग में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, समाज और क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
उजल बाघ स्वर्गीय प्रदीप बाघ एवं श्रीमती बिलासिनी बाघ के सुपुत्र हैं। ग्राम अर्जुण्डा, विकासखंड सरायपाली, जिला महासमुंद के निवासी उजल ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद अपनी मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण से चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश पाने का सपना साकार किया है। उनकी सफलता उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखते हैं।
उजल बाघ ने अपनी सफलता का श्रेय अपने प्रेरणास्रोत डॉ. अमित भोई एवं उनके पिता श्री रविंद्र भोई को दिया है। उन्होंने बताया कि उन्हें सदैव आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने अपने माता-पिता, परिवार के बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद तथा शिक्षकों के मार्गदर्शन को भी अपनी सफलता का आधार बताया।
उन्होंने कक्षा 12वीं की पढ़ाई शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल कलेण्डा (तोरेसिंहा) से पूरी की। उनके शैक्षणिक जीवन में प्राथमिक स्तर पर शिक्षा प्रदान करने वाली शिक्षिका श्रीमती विमला पटेल एवं शिक्षक बिशी केशन भोई का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उजल बाघ की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे मगधा यादव समाज एवं विकासखंड सरायपाली के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि आर्थिक परिस्थितियां प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं। मेहनत, लगन, उचित मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।
उजल की इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों एवं समाजजनों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। समाजजनों को उम्मीद है कि उजल भविष्य में एक कुशल चिकित्सक बनकर मानव सेवा करेंगे और समाज एवं देश के विकास में अपना योगदान देंगे।






























